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पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा


मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून के आगमन से पहले हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है। नगर निगम और प्रशासन की ओर से नाले-नालियों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धरातल पर कमजोर नजर आए। शहर के कई हिस्सों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के व्यस्त मार्गों और प्रमुख चौराहों पर देखने को मिला। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज तक का मार्ग महज कुछ मिनटों की बारिश में पानी से भर गया। सड़क पर इतना पानी जमा हो गया कि वाहन चालकों को रास्ता पहचानने में भी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इस इलाके में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है।

रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से एम्स की ओर जाने वाले फ्लाइओवर पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। सड़क पर पानी भरने के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी वाहनों की कतार में फंस गई, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा।

शहर के पॉश इलाकों में शामिल रानी कमलापति स्टेशन रोड, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और सात नंबर क्षेत्र भी जलभराव से अछूते नहीं रहे। इन क्षेत्रों में सड़कों पर घंटों पानी जमा रहा। कई जगहों पर जल निकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई, जिसके कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

भोपाल में अधूरी सड़क परियोजनाएं भी बारिश के दौरान बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। कई इलाकों में सीवेज पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए महीनों पहले सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन अब तक उनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया। रचना नगर समेत कई कॉलोनियों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है।

वहीं खुले नाले भी शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बागसेवनियां से कटारा हिल्स मार्ग और दस नंबर मार्केट सहित कई क्षेत्रों में नालों को अब तक ढंका नहीं गया है। बारिश के दौरान नाले और सड़क के बीच का अंतर मिट जाता है, जिससे लोगों के गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार बच्चे और राहगीर नालों में गिर चुके हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले भी एक बच्चे की जान नाले में गिरने से जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

नगर निगम ने मानसून से पहले विशेष सफाई अभियान चलाने और जलभराव की समस्या को नियंत्रित करने का दावा किया था। हालांकि पहली ही बारिश ने इन तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही यह स्थिति है, तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।

अब लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम पर है कि वे मानसून के दौरान जलभराव, खुले नालों और अधूरी सड़कों जैसी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से कर पाते हैं। राजधानी के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बारिश उनके लिए राहत लेकर आए, परेशानी नहीं।

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