मेयर मालती राय ने कहा कि अपर लेक से सप्लाई होने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित है और यह RO से भी बेहतर गुणवत्ता का है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और निगम के जल सप्लाई सिस्टम पर भरोसा रखने की अपील की। निरीक्षण के दौरान भाजपा पार्षद रवींद्र यति और नगर निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने मेयर को जानकारी दी कि एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में पानी के सैंपल की जांच की गई है, जिसमें पीएच लेवल, टीडीएस, टर्बिडिटी और बैक्टीरियल सेफ्टी सभी मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। नगर निगम का दावा है कि अब तक 20 हजार से अधिक पानी के सैंपल की जांच की जा चुकी है और सभी रिपोर्ट संतोषजनक रही हैं।
हालांकि दूसरी ओर शहर में लो-प्रेशर और गंदे पानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। अधिकारियों ने माना कि बार-बार बिजली कटौती होने से पंपिंग सिस्टम प्रभावित होता है, जिसके कारण कई इलाकों में पानी का दबाव कम हो जाता है। सिस्टम को दोबारा शुरू करने में समय लगने से सप्लाई प्रभावित हो रही है।
नगर निगम के आंकड़े भी शहर की जल व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं। निगम के अनुसार 1 जनवरी से अब तक 5,610 पाइपलाइन लीकेज सुधारे गए हैं। इसका मतलब है कि पिछले करीब पांच महीनों में रोज औसतन 38 पाइपलाइन लीकेज सामने आए हैं।
इसके अलावा नगर निगम ने 15 हजार से अधिक सीवेज चैंबरों की सफाई भी कराई है ताकि जलभराव और ओवरफ्लो जैसी समस्याओं को रोका जा सके। बावजूद इसके विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट का पानी भले शुद्ध हो, लेकिन पुरानी और बार-बार टूटने वाली पाइपलाइनें घरों तक पहुंचते-पहुंचते पानी को दूषित कर सकती हैं। मेयर के इस निरीक्षण और दावे के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम पानी की गुणवत्ता के साथ वितरण व्यवस्था को सुधारने के लिए कितनी तेजी से काम करता है।