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केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज


मध्य प्रदेश । खंडवा जिले में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में व्यापक असर देखने को मिला, जहां करीब 450 मेडिकल स्टोर एक दिन के लिए बंद रहे। जिलेभर के केमिस्टों ने एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्य मौजूद रहे और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे को ज्ञापन सौंपा।

दोपहर के समय आयोजित इस प्रदर्शन में खंडवा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के साथ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया, जिससे आंदोलन और अधिक व्यापक रूप में दिखाई दिया। केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श और फर्जी या असत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की बिक्री की जा रही है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

एसोसिएशन अध्यक्ष गोवर्धन गोलानी ने आरोप लगाया कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री, फ्री होम डिलीवरी और भारी छूट की नीति छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्ट व्यापारियों के अस्तित्व को संकट में डाल रही है। उनका कहना है कि यह स्थिति न केवल बाजार को असंतुलित कर रही है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

केमिस्टों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और 1945 के नियमों में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं का वितरण कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और कोविड काल में जारी GSR 220(E) का हवाला देते हुए कहा कि इनका गलत उपयोग किया जा रहा है, जिससे अनियंत्रित दवा वितरण को बढ़ावा मिल रहा है।

केमिस्ट संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवा वितरण पर तुरंत रोक लगाई जाए और अवैध ऑनलाइन बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही GSR 817(E) और GSR 220(E) को वापस लेने तथा ऑनलाइन कंपनियों की प्रीडेटरी प्राइसिंग और अत्यधिक छूट नीति पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

प्रदर्शन के दौरान केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान उन्होंने बिना रुके दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की अनियंत्रित गतिविधियों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और छोटे दवा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण प्रणाली दोनों संतुलित रह सकें।

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