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शिवपुरी में बड़ा घोटाला: 71 लाख की मशीन बनी 4.32 करोड़ का बोझ, EOW की सर्जिकल स्ट्राइक जारी


नई दिल्ली। शिवपुरी नगर पालिका में वर्ष 2015 के दौरान की गई स्वच्छता मशीनों की खरीद अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। उस समय लगभग 71.69 लाख रुपये की मशीनें खरीदी गई थीं लेकिन नियमों को दरकिनार कर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। आरोप है कि ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया को अनदेखा करते हुए एक ही दिन में सभी कार्यादेश जारी कर दिए गए और भुगतान भी तत्काल कर दिया गया। इस पूरे मामले में एक निजी फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि जिन आठ मशीनों का भुगतान किया गया उनमें से चार मशीनें नगर पालिका को कभी प्राप्त ही नहीं हुईं।

दूसरा भाग करोड़ों की रिकवरी और कानूनी पेच
मामला आगे बढ़ते हुए एमएसएमई काउंसिल तक पहुंचा जहां मूल राशि पर भारी ब्याज जोड़ते हुए कुल 4.32 करोड़ रुपये की रिकवरी तय की गई है। यह राशि मूल खरीद से कई गुना अधिक हो चुकी है जिससे नगर पालिका पर बड़ा वित्तीय बोझ खड़ा हो गया है। दूसरी ओर संबंधित कंपनी ने हाई कोर्ट में नगर पालिका के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर कर दी हैं जिससे मामला और उलझ गया है। आगामी 11 मई 2026 को इस प्रकरण की महत्वपूर्ण सुनवाई तय की गई है। नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों और गलत आदेशों के आधार पर किया गया भुगतान है जिससे संस्था को भारी नुकसान हुआ है।

तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआर
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं।

तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआर

इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं।

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