परमाणु ऊर्जा की नई सुबह: भारत ने ईंधन खत्म होने के डर को दी चुनौती

– निशान्त तमिलनाडु के कल्पक्कम में समुद्र के किनारे खड़ा एक रिएक्टर बाहर से देखने पर किसी और पावर प्लांट जैसा ही लगता है। लेकिन 6 अप्रैल 2026 को यहां कुछ ऐसा हुआ जिसने भारत की ऊर्जा कहानी को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया। Prototype Fast Breeder Reactor ने पहली क्रिटिकलिटी हासिल की। […]
भारतीयता में समाहित है वैश्विक कल्याण का मार्ग

– प्रो. एस. के. सिंहवर्तमान में अविश्वास की परतों से घिरी हुई विश्व व्यवस्था अनेक प्रकार के संघर्षों एवं अस्थिरताओं से जूझ रही है। ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल युद्ध, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई असंगत कार्यवाही, लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध, पर्यावरण संकट, मानसिक तनाव एवं बढ़ती असहिष्णुता इस बात का प्रमाण है […]
आखिर कब तक बचाव कर पाएंगी ममता दीदी ?

– मृत्युंजय दीक्षित वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधनासभा चुनाव घोषित हो चुके हैं। जैसे -जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राज्य की राजनीति का पारा चढ़ रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए अपने प्रचार को आक्रामक बना चुकी हैं। उनके लिए इस बार राह […]
‘सभ्यता खत्म’ के बयान पर घिरते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

-सुनील कुमार महलामध्य-पूर्व में जारी युद्ध को 40 दिन से अधिक समय हो चुका है तथा लगातार हमलों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो […]
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस

-ललित गर्ग विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि […]
ऊर्जा संकट से कैसे बाहर निकलें मजदूर ?

– सौरभ वार्ष्णेयआज जब देश ऊर्जा संकट की चुनौती से जूझ रहा है, उसका सबसे गहरा असर समाज के उस वर्ग पर पड़ रहा है जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर है—मजदूर वर्ग। महंगी बिजली, बढ़ते ईंधन दाम और अनिश्चित रोजगार ने मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी को और कठिन बना दिया है। […]
क्षणिक लोकप्रियता की दौड़ में सिमटता साहित्यिक मूल्य

– डॉ. प्रियंका सौरभ डिजिटल युग ने अभिव्यक्ति के स्वरूप को अभूतपूर्व गति और विस्तार दिया है। आज हर व्यक्ति के हाथ में एक मंच है—एक ऐसा मंच, जहाँ वह अपनी बात तुरंत लाखों लोगों तक पहुँचा सकता है। यह लोकतंत्रीकरण अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। परंतु हर शक्ति के साथ एक जिम्मेदारी […]
क्या डिजिटल राजनैतिक प्रचार की कोई नैतिक सीमा है?

– डॉ. शैलेश शुक्ला राजनीतिक प्रचार उतना ही पुराना है जितनी कि राजनीति स्वयं। प्राचीन रोम में दीवारों पर संदेश लिखे जाते थे। मध्यकाल में राजा अपनी शक्ति का प्रदर्शन भव्य स्मारकों और अनुष्ठानों के माध्यम से करते थे। बीसवीं सदी में रेडियो, टेलीविज़न और समाचार पत्र राजनीतिक प्रचार के मुख्य माध्यम बने। लेकिन इन […]
भारत: अस्थिर दुनिया में आत्म निर्भरता जरूरी

– प्रो. महेश चंद गुप्तादुनिया अब अलग-अलग बिखरे देशों का नक्शा मात्र नहीं रही है। यह एक ऐसा तंत्र बन गई है जिसमें कहीं भी हलचल होती है तो उसकी तरंगें दुनिया के हर कोने तक पहुंचती हैं। हाल में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच टकराव की स्थिति के बाद पैदा हुए तनाव ने […]
वैश्विक भारत : उद्योगों की रफ्तार, अर्थव्यवस्था का विस्तार

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ऐसी शक्ति के रूप में उभर रहा है, जिसकी गति, स्थिरता और विविधता ये तीनों ही उसे विशेष बनाती हैं। इस संबंध में सामने आए आर्थिक आंकड़े इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। विशेष […]