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फुटबॉल में विवाद गहराया, सीएएफ के फैसले के खिलाफ सेनेगल जाएगी CAS


नई दिल्ली। अफ़्रीकी फ़ुटबॉल में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ अफ़्रीकी फ़ुटबॉल ने अफ़्रीका कप ऑफ़ नेशंस 2026 के फ़ाइनल का नतीजा पलटते हुए मोरक्को की नेशनल फ़ुटबॉल टीम को चैंपियन घोषित कर दिया है। इस फ़ैसले के बाद सेनेगल की नेशनल फ़ुटबॉल टीम के ख़िलाफ़ अब कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फ़ॉर स्पोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।

मैच का नतीजा कैसे पलटा गया?

जनवरी में खेले गए फ़ाइनल में सेनेगल ने 1-0 से जीत दर्ज की थी, लेकिन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ अफ़्रीकी फ़ुटबॉल की अपील समिति ने इसे पलटते हुए 3-0 से मोरक्को के पक्ष में कर दिया।

कारण-सेनेगल द्वारा मैदान छोड़ा गया, जिसे टूर्नामेंट नियमों (आर्टिकल 82 और 84) का उल्लंघन माना गया।

विवाद की जड़ क्या थी?

मैच के स्टॉपेज टाइम में बड़ा ड्रामा हुआ-

सेनेगल का गोल रेफरी ने फाउल बताकर कैंसिल कर दिया

इसके बाद मोरक्को को पेनल्टी मिली

इस फैसले से नाराज़ कोच ने टीम को मैदान से बाहर बुलाया

करीब 20 मिनट बाद सादियो माने के समझाने पर टीम वापस लौटी, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

सेनेगल का कड़ा विरोध

सेनेगल फुटबॉल फेडरेशन ने इस फैसले को “मजाक” बताया और कहा कि इसका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। अब मामला कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट में ले जाएगा, जहां आखिरी फैसला होगा।

50 साल बाद मोरक्को बना चैंपियन

इस फैसले के बाद मोरक्को नेशनल फुटबॉल टीम ने 50 साल बाद अपना दूसरा AFCON खिताब जीता लिया। मोरक्को फुटबॉल फेडरेशन ने CAF के फैसले का सपोर्ट करते हुए कहा कि इससे नियमों की सख्ती और स्थिरता बनी रहेगी।

खिलाड़ियों पर भी असर

इस्माइल सैबारी पर लगा 100,000 डॉलर का जुर्माना निकाला गया

उनका सस्पेंशन 3 मैच से बदलकर 1 मैच कर दिया गया

हालांकि VAR में इंटरवेंशन से जुड़े कुछ और जुर्माने बने हुए हैं

फुटबॉल की साख पर सवाल

यह मामला अब सिर्फ एक मैच तक लिमिटेड नहीं रहा, बल्कि अफ्रीकी फुटबॉल की भरोसेमंद और नियमों पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। अब सबकी नजर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट के आखिरी फैसले पर है।

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