नगर निगम की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में 4 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई से पहले शुरू की गई है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन और स्वीकृत उपयोग के विपरीत भवनों के इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। इसी के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने स्थानीय निकायों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
भोपाल नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने सभी जोनों में विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें मौके पर जाकर यह जांच कर रही हैं कि जिन भवनों को आवासीय उपयोग के लिए अनुमति दी गई थी, उनमें कहीं अस्पताल, बैंक, होटल, शोरूम, दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां तो संचालित नहीं हो रहीं। जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है।
नोटिस में मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 का उल्लेख करते हुए भवन स्वामी से संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो निगम एकपक्षीय कार्रवाई कर सकता है। इसमें जुर्माना, उपयोग परिवर्तन शुल्क या अन्य कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं।
नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि चार वर्ष पहले किए गए सर्वे में केवल अरेरा कॉलोनी में 83 और रोहित नगर में 67 मामलों सहित 150 से अधिक ऐसे भवन चिन्हित हुए थे, जहां आवासीय अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ी है। इसलिए इस बार केवल पुराने रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय नए सिरे से भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भोपाल में करीब 25 हजार संपत्तियां ऐसी हैं जो रिकॉर्ड में अब भी आवासीय श्रेणी में दर्ज हैं, लेकिन उनसे व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर वसूला जा रहा है। ऐसे मामलों में भूमि उपयोग और भवन अनुमति की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।
नगर निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य शहर में नियोजित विकास सुनिश्चित करना, यातायात और पार्किंग संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करना तथा भवन उपयोग से जुड़े नियमों का पालन कराना है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई पूरे शहर में व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकती है।