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राजेंद्र कुमार के बेटे और संजय दत्त के जीजा होने के बावजूद क्यों नहीं चला कुमार गौरव का फिल्मी सफर, सफलता के बाद कहां छूट गई रफ्तार?

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत बेहद शानदार अंदाज में की, लेकिन शुरुआती सफलता को लंबे समय तक कायम नहीं रख सके। अभिनेता कुमार गौरव भी ऐसे ही सितारों में शामिल हैं, जिन्होंने पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई, लेकिन समय के साथ उनका फिल्मी सफर अपेक्षित ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच सका। उनके करियर की कहानी आज भी बॉलीवुड में सफलता और संघर्ष के अनोखे उदाहरण के रूप में याद की जाती है।

11 जुलाई 1967 को जन्मे कुमार गौरव प्रसिद्ध अभिनेता राजेंद्र कुमार के बेटे हैं। फिल्मी माहौल में पले-बढ़े कुमार गौरव का अभिनय की दुनिया में आना लगभग तय माना जाता था। वर्ष 1981 में उन्होंने निर्देशक राहुल रवैल की रोमांटिक फिल्म ‘लव स्टोरी’ से बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म ने रिलीज के साथ ही शानदार सफलता हासिल की और कुमार गौरव रातोंरात युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरा बन गए। उनकी सादगी, रोमांटिक छवि और अलग अंदाज ने उन्हें उस दौर के सबसे चर्चित नए सितारों में शामिल कर दिया।

‘लव स्टोरी’ की सफलता के बाद दर्शकों और फिल्म जगत को उम्मीद थी कि कुमार गौरव लंबे समय तक बॉलीवुड पर राज करेंगे। इसके बाद उन्होंने ‘तेरी कसम’, ‘स्टार’, ‘लवर्स’, ‘नाम’, ‘फूल’ और ‘कांटे’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। हालांकि इनमें से कुछ फिल्मों को सराहना मिली, लेकिन उन्हें पहली फिल्म जैसी लोकप्रियता और व्यावसायिक सफलता दोबारा नहीं मिल सकी। लगातार बदलते फिल्मी दौर और दर्शकों की पसंद ने भी उनके करियर को प्रभावित किया।

कुमार गौरव के करियर से जुड़ा एक चर्चित किस्सा भी समय-समय पर सामने आता रहा है। कहा जाता है कि शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने कुछ नई अभिनेत्रियों के साथ काम करने के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए। इसी संदर्भ में अभिनेत्री मंदाकिनी के साथ फिल्म न करने की चर्चा भी अक्सर होती रही। हालांकि इस विषय पर अलग-अलग समय पर विभिन्न दावे किए गए हैं, लेकिन इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे फिल्मी गलियारों में प्रचलित चर्चाओं के रूप में ही देखा जाता है।

समय के साथ उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं। इसके बाद उन्होंने अलग तरह की भूमिकाएं भी निभाईं, लेकिन दर्शकों के बीच वह प्रभाव दोबारा नहीं बन पाया जो उन्हें पहली फिल्म से मिला था। वर्ष 2002 में ‘कांटे’ में नजर आने के बाद उन्होंने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली। बाद में वह एक छोटे प्रोजेक्ट में दिखाई दिए, लेकिन बड़े पर्दे पर उनकी सक्रिय मौजूदगी फिर देखने को नहीं मिली।

फिल्मों से दूरी बनाने के बाद कुमार गौरव ने व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाने का निर्णय लिया। निजी जीवन में उन्होंने नम्रता दत्त से विवाह किया, जो अभिनेता संजय दत्त की बहन हैं। इस रिश्ते के कारण उनका परिवार बॉलीवुड के कई प्रमुख कलाकारों से जुड़ा रहा, लेकिन उन्होंने लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और फिल्मी गतिविधियों से दूरी बनाए रखी है।

कुमार गौरव का करियर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि फिल्म उद्योग में शुरुआती सफलता जितनी महत्वपूर्ण होती है, उससे कहीं अधिक चुनौती उसे लगातार बनाए रखने की होती है। प्रतिभा, अवसर, सही फिल्मों का चयन और बदलते दर्शक रुझानों के साथ तालमेल ही किसी कलाकार के लंबे और सफल करियर की सबसे बड़ी कसौटी माने जाते हैं।

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