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सोने की कीमतों में उछाल से ज्वेलरी बाजार पर दबाव, बिक्री घटी लेकिन कंपनियों की कमाई में जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान

नई दिल्ली । देश में लगातार बढ़ती सोने की कीमतों ने ज्वेलरी बाजार की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। एक ओर जहां ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर ज्वेलरी कंपनियों की आय में वृद्धि के संकेत भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में तेज उछाल और हाल ही में आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी का सीधा असर बाजार की मांग पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में बिक्री मात्रा में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है।

बाजार विश्लेषण के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में संगठित गोल्ड ज्वेलरी सेक्टर की बिक्री मात्रा में लगभग 13 से 15 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में भी ज्वेलरी बिक्री में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही हैं। सोने की ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ता अपनी खरीदारी योजनाओं में बदलाव कर रहे हैं और भारी तथा महंगे गहनों की बजाय हल्के वजन और कम कैरेट वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इसके बावजूद, कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि बिक्री मात्रा में गिरावट के बावजूद कुल राजस्व में वृद्धि की संभावना बनी हुई है। अनुमान है कि ज्वेलरी कंपनियों की आय में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं, जिनकी वजह से प्रति यूनिट बिक्री मूल्य बढ़ गया है। यानी ग्राहक कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, लेकिन कीमत अधिक होने के कारण कंपनियों की कुल कमाई बढ़ सकती है।

सरकारी स्तर पर हाल ही में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है। इसका उद्देश्य न केवल आयात को नियंत्रित करना है, बल्कि देश के व्यापार घाटे को कम करना और रुपये को स्थिर बनाए रखना भी है। इस कदम से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल रहा है, जिससे मांग और प्रभावित हो रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, देश में गोल्ड की कुल मांग इस वित्त वर्ष में 620 से 640 टन के बीच रहने का अनुमान है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कमजोर स्तरों में से एक माना जा सकता है। कोविड काल को छोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है।

सोने की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी बड़ा बदलाव किया है। अब लोग निवेश और गहनों दोनों के लिए सोने की खरीद में अधिक सतर्क हो गए हैं। बीते वर्षों में जहां निवेश के लिए गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में तेजी देखी गई थी, वहीं अब बाजार में हल्के और डिजाइनर ज्वेलरी की ओर झुकाव बढ़ा है। 16 से 22 कैरेट ज्वेलरी की मांग में वृद्धि दर्ज की जा रही है क्योंकि ये अपेक्षाकृत सस्ती और उपयोगी विकल्प मानी जा रही हैं।

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सोने की कीमतों का यह उछाल बाजार के स्वरूप को बदल रहा है। जहां एक ओर मांग में कमी चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर कीमतों के सहारे कंपनियों की आय में बढ़ोतरी एक नया संतुलन बना रही है, जो आने वाले महीनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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