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क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, इंदौर से चला नेटवर्क चंडीगढ़, बेंगलुरु और दिल्ली तक फैला


मध्यप्रदेश । इंदौर में क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपए की कथित ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका संचालन चंडीगढ़, बेंगलुरु, दिल्ली और अन्य शहरों तक फैला हुआ था। आरोप है कि गिरोह लोगों को कम समय में भारी मुनाफे और रकम दोगुनी होने का लालच देकर निवेश करवाता था, लेकिन बाद में न तो मुनाफा देता था और न ही मूल राशि लौटाता था।

पुलिस के अनुसार, मामले में हरप्रीत कौर उर्फ मोना, जसवंत सिंह उर्फ जस्सी, अनिरुद्ध दलवी, मुकेश तायडे और जोसेफ सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल हरप्रीत कौर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

क्राइम ब्रांच को जिया वाधवानी, गुरजीत, अभिषेक, जसरथ, अमरजीत, हन्नी, साहिल, रोहित, पंकज, गुरमीत कौर समेत कई लोगों ने शिकायत दी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने पर शुरुआत में 2 प्रतिशत तक रिटर्न और 100 दिनों में रकम दोगुनी होने का दावा किया था। इसी भरोसे में लोगों ने लाखों रुपए निवेश किए।

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने मिलकर “ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी” नाम से एक कथित यूएस बेस्ड कंपनी का प्रचार किया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी के नाम और विदेशी कारोबार के दावों का इस्तेमाल निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए किया गया। पुलिस के अनुसार, निवेशकों से प्राप्त राशि हरप्रीत कौर और कंपनी से जुड़े बैंक खातों में जमा करवाई गई थी। प्रारंभिक जांच में करीब ढाई करोड़ रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

पीड़िता जिया वाधवानी ने पुलिस को बताया कि उसकी पहचान हरप्रीत कौर से एक किटी पार्टी के दौरान हुई थी। वहीं से उसे निवेश योजना की जानकारी दी गई। बाद में उसे भंवरकुआ क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में ले जाया गया, जहां अन्य आरोपियों ने कथित निवेश योजना प्रस्तुत की। इसके बाद शहर के एक बड़े होटल में सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को बुलाया गया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, सेमिनार में महंगे उपहार, आकर्षक प्रस्तुतियां और बड़े मुनाफे के वादों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया।

पीड़ितों का आरोप है कि मार्च 2025 के बाद किसी भी निवेशक को भुगतान नहीं किया गया। जब लोगों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपियों ने वेबसाइट अपडेट, तकनीकी समस्या और भुगतान प्रक्रिया में देरी जैसे कारण बताकर समय टालना शुरू कर दिया। बाद में ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से भी निवेशकों को आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, लगातार दबाव बढ़ने पर आरोपियों ने कथित तौर पर यह कह दिया कि कंपनी का कारोबार बंद हो चुका है और अब किसी को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसके बाद कई आरोपियों ने फोन उठाना और संपर्क करना भी बंद कर दिया।

क्राइम ब्रांच का कहना है कि मामले की जांच जारी है। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, निवेश रिकॉर्ड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित निवेश योजना से कुल कितने लोग प्रभावित हुए और ठगी की वास्तविक राशि कितनी है।

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