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समीक्षा बैठक में देर से पहुंचे अधिकारी पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन, डीडीपीओ तत्काल निलंबित


नई दिल्ली ।
हरियाणा सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन पर जोर देने की नीति के बीच नारनौल में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। जिले के विकास कार्यों और विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) प्रमोद कुमार के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री के इस निर्णय के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

नारनौल स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में जिले के विकास कार्यों, पंचायत योजनाओं और विभिन्न विभागों की प्रगति का आकलन किया जा रहा था। बैठक में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दौरान कुछ विभागों के कार्यों को लेकर शिकायतें और अनियमितताओं से जुड़ी बातें भी सामने आईं, जिन पर मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की।

जानकारी के अनुसार, समीक्षा बैठक के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि इसमें विकास परियोजनाओं की प्रगति और जनहित से जुड़े कार्यों की समीक्षा की जानी थी। इसके बावजूद जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार समय पर बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। इस स्थिति को मंत्री ने गंभीरता से लिया और इसे प्रशासनिक अनुशासन के उल्लंघन के रूप में देखा।

बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकारी योजनाओं और जनहित के कार्यों के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इसी क्रम में डीडीपीओ के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई के आदेश जारी किए गए।

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य केवल किसी एक अधिकारी के खिलाफ कदम उठाना नहीं होता, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेही और अनुशासन का संदेश देना भी होता है। सरकारें अक्सर विकास योजनाओं की प्रभावी निगरानी और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान देती हैं।

बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ उपायुक्त और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान सड़क, पंचायत, स्वास्थ्य और अन्य विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने और जनता से जुड़े मामलों में तत्परता दिखाने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य मंत्री की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती और कार्यसंस्कृति में सुधार के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में कई राज्य सरकारें अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और विकास परियोजनाओं की निगरानी को लेकर अधिक सक्रिय हुई हैं। ऐसे में नारनौल में हुई यह कार्रवाई भी उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समय की पाबंदी, कार्य निष्पादन और विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का प्रभाव भविष्य में अधिकारियों की कार्यशैली और सरकारी बैठकों में अनुशासन के पालन पर भी दिखाई दे सकता है।

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