वजन सामान्य से बेहद कम, कुपोषण की पुष्टि
बच्चों का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। डॉक्टरों के अनुसार, 4 माह के बच्चे का सामान्य वजन 4 से 5 किलो होना चाहिए, जबकि इन जुड़वा बच्चों का वजन बेहद कम है बालक नैतिक का 2.953 किलो और बालिका सुप्रांशी का 2.862 किलो।
डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति गंभीर कुपोषण की ओर इशारा करती है।
स्तनपान की जगह दिया गया गाय-भैंस का दूध
परिजनों ने बताया कि बच्चों को स्तनपान कराने के बजाय गाय और भैंस का दूध दिया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से 6 माह तक केवल मां का दूध ही बच्चे के लिए सबसे जरूरी पोषण होता है, जिसकी कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
15 दिन झोलाछाप से कराया इलाज
बच्चे पिछले 15 दिनों से बुखार और डायरिया से पीड़ित थे, लेकिन परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराते रहे। इस दौरान वे लगभग 5 बार उसके पास गए। जब हालत और बिगड़ गई, तब जाकर उन्हें सीएचसी मझगवां लाया गया, जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
PICU में भर्ती, हालत नाजुक
दोनों बच्चों को फिलहाल जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में भर्ती किया गया है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर लगातार निगरानी में इलाज कर रहे हैं।
आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य व्यवस्था की जांच
महिला एवं बाल विकास विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है कि बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत थे या नहीं। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि समय रहते स्वास्थ्य सेवाएं क्यों नहीं मिलीं।
गांव में पहले भी हो चुकी है कुपोषण से मौत
सुरांगी गांव में कुपोषण का यह पहला मामला नहीं है। करीब 4 साल पहले भी इसी गांव में एक बच्ची की कुपोषण से मौत हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।