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उत्तराखंड में पांच भाइयों की एक साथ शादी, 'जोझोड़े' प्रथा ने बिखेरी सांस्कृतिक चमक।


नई दिल्ली । परंपराओं का अनूठा मिलन: चकराता के एक ही मंडप में पांच भाइयों ने रचाया इतिहास, जब खुद बारात लेकर दूल्हों के द्वार पहुँचीं दुल्हनें उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसे चकराता के खरासी गांव ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच एक संयुक्त परिवार ने अपनी जड़ों और संस्कृति को जिस खूबसूरती से दुनिया के सामने रखा है, वह काबिले तारीफ है। यहाँ एक ही छत के नीचे, एक ही दिन और एक ही मंडप में एक परिवार के पांच भाइयों का विवाह संस्कार संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल पारिवारिक प्रेम और एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि इसने क्षेत्र की उस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत कर दिया, जो सदियों से इस समाज की पहचान रही है।

इस विवाह की सबसे चर्चित और आकर्षक कड़ी यहाँ की विशेष ‘जोझोड़े’ परंपरा रही। जहाँ आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर वधू के घर जाता है, वहीं इस पारंपरिक रिवाज के अनुसार पांचों दुल्हनें स्वयं गाजे-बाजे और बारातियों के साथ दूल्हों के घर पहुंचीं। नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल नामक पांचों भाइयों ने अपनी जीवनसंगिनियों के साथ देवभूमि की पावन परंपराओं के बीच सात फेरे लिए। जौनसार-बावर क्षेत्र की यह अनूठी प्रथा न केवल महिलाओं के सम्मान को दर्शाती है, बल्कि यह संयुक्त परिवार के भीतर अनुशासन और आपसी तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करती है।

आयोजन की सादगी और भव्यता का संगम देखकर हर कोई दंग रह गया। गाँव के बुजुर्गों और मेहमानों का मानना है कि सामूहिक विवाह की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है। जहाँ एक ओर यह फिजूलखर्ची को रोकता है, वहीं दूसरी ओर यह रिश्तों की मिठास और सामूहिक आनंद को कई गुना बढ़ा देता है। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग जमा हुए थे। भाइयों की शादी के इस उत्सव के ठीक अगले दिन परिवार की बेटी का विवाह भी निर्धारित है, जिससे पूरा घर और गाँव खुशियों के दोहरे उल्लास में सराबोर नजर आ रहा है।

सोशल मीडिया पर इस ‘यूनिक वेडिंग’ की तस्वीरें और वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं। लोग इसे जौनसारी संस्कृति और लोक-परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं।

पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर थिरकते ग्रामीण और रीति-रिवाजों का पालन करते ये पांचों जोड़े यह संदेश दे रहे हैं कि हम चाहे कितने भी आधुनिक हो जाएं, अपनी जड़ों से जुड़कर ही हम वास्तविक गौरव प्राप्त कर सकते हैं। यह सामूहिक विवाह उत्सव लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों की यादों में एक प्रेरक गाथा के रूप में जीवित रहेगा।

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