एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था के लिए केवल विकास दर हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और विकास समावेशी तथा टिकाऊ स्वरूप ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, प्रभावी नीतियों और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बिना दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखना कठिन हो सकता है।
सीतारमण ने कहा कि भारत वर्तमान में कई आर्थिक संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन यह स्थिति स्थायी रूप से सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार समय-समय पर नीतियों का मूल्यांकन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना आवश्यक है जहां सुधार की गुंजाइश अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि बदलती घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत ढांचे को लगातार अद्यतन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास को गति देने के लिए देश की उत्पादन क्षमता, कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें अतिरिक्त नीति समर्थन और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। विशेष रूप से जटिल विनिर्माण, मध्यवर्ती उत्पादों और विशिष्ट सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नई रणनीतियों की जरूरत महसूस की जा रही है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिन चुनौतियों पर चर्चा होती रही है, अब उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने का समय है। इसके लिए बेहतर क्रियान्वयन, संस्थागत क्षमता निर्माण और आवश्यकतानुसार नई नीतियों का निर्माण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी नीतियों को लचीला और परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया स्वतः संचालित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी, सुधार और दूरदर्शी योजना की आवश्यकता होती है।
कोविड-19 महामारी के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी से जुड़े कुछ असर अब भी आर्थिक योजना और अपेक्षाओं को प्रभावित करते हैं। हालांकि वर्तमान समय में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है, फिर भी सरकार संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक तैयारियां कर रही है।
वित्त मंत्री ने मौसम संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एल नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि उचित नीतियों, मजबूत संस्थागत ढांचे और निरंतर सुधारों के माध्यम से भारत अपनी दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को और अधिक सशक्त बना सकेगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।