Mahakaushal Times

निवेशकों की उम्मीदें चरम पर, Goldline Pharmaceutical IPO की लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह


नई दिल्ली ।
फार्मास्युटिकल सेक्टर की उभरती कंपनी Goldline Pharmaceutical का आईपीओ बाजार में जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग से पहले ही निवेशकों के बीच उत्साह चरम पर पहुंच गया है। मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम और रिकॉर्डतोड़ सब्सक्रिप्शन ने इस आईपीओ को निवेशकों के लिए सबसे चर्चित इश्यू में बदल दिया है। अब सभी की निगाहें कंपनी की लिस्टिंग पर टिकी हुई हैं, जहां निवेशकों को शानदार रिटर्न मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कंपनी का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू के रूप में बाजार में आया था और इसका आकार लगभग 11.61 करोड़ रुपये रखा गया था। कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 41 से 43 रुपये प्रति शेयर तय किया था। आईपीओ खुलते ही निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली और अंतिम दिन तक यह इश्यू कई गुना सब्सक्राइब हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे आकार के बावजूद कंपनी ने जिस तरह निवेशकों का विश्वास हासिल किया है, वह इसकी कारोबारी संभावनाओं को दर्शाता है।

ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर काफी सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। बाजार सूत्रों के अनुसार कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 15 रुपये तक पहुंच गया है, जो इसके ऊपरी प्राइस बैंड की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत अधिक माना जा रहा है। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी के शेयर करीब 58 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों को पहले ही दिन मजबूत लिस्टिंग गेन हासिल हो सकता है। हालांकि बाजार जानकार यह भी मानते हैं कि ग्रे मार्केट केवल संकेत देता है और इसमें उतार-चढ़ाव तेजी से हो सकते हैं।

इस आईपीओ की सबसे बड़ी खासियत इसका रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन रहा। रिटेल निवेशकों से लेकर संस्थागत निवेशकों तक सभी श्रेणियों में जबरदस्त मांग देखने को मिली। रिटेल कैटेगरी में भारी आवेदन आने से यह स्पष्ट हो गया कि छोटे निवेशकों को कंपनी की भविष्य की संभावनाओं पर मजबूत भरोसा है। वहीं गैर-संस्थागत निवेशकों और योग्य संस्थागत खरीदारों की तरफ से भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। बाजार में यह धारणा बन गई है कि कंपनी का कारोबार आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार कर सकता है।

Goldline Pharmaceutical एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल पर काम करती है। इस मॉडल के तहत कंपनी खुद उत्पादन इकाइयों में भारी निवेश करने के बजाय तीसरी पार्टियों से दवाइयों का निर्माण करवाती है और फिर अपने ब्रांड नाम से उन्हें बाजार में बेचती है। कंपनी कार्डियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, डायबिटीज केयर और क्रिटिकल केयर जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते मेडिकल क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी रखती है। यही कारण है कि निवेशकों को कंपनी के कारोबार में लंबी अवधि की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले वर्षों में लगातार वृद्धि दर्ज की है। कंपनी की आय में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है, वहीं मुनाफे में भी मजबूत उछाल दर्ज किया गया है। यही सकारात्मक वित्तीय आंकड़े निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी आने वाले समय में अपने कारोबार के विस्तार और वित्तीय प्रदर्शन को इसी तरह बनाए रखती है, तो यह निवेशकों के लिए लंबी अवधि में भी आकर्षक साबित हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर