यह अभियान 15 जनवरी से 30 अप्रैल 2026 तक संचालित किया गया। कार्रवाई से पहले विभिन्न देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने साइबर अपराधियों के बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट, फर्जी कंपनियों, फोन नंबरों और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान किया। समन्वित रणनीति के तहत कई देशों में एक साथ छापेमारी कर साइबर ठगी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को निशाना बनाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य सोशल इंजीनियरिंग स्कैम पर रोक लगाना था। इस तरह की ठगी में अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, सरकारी एजेंसी के प्रतिनिधि, निवेश सलाहकार या अन्य विश्वसनीय व्यक्ति बताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल पर नकली वर्दी और सरकारी कार्यालय जैसा माहौल दिखाकर लोगों को डराया या लालच दिया जाता है, जिसके बाद उनसे बैंकिंग जानकारी या धनराशि हासिल कर ली जाती है।
ऑपरेशन के दौरान 1.42 लाख से अधिक संभावित पीड़ितों की पहचान की गई और 1,52,808 मामलों का विश्लेषण किया गया। इनमें से 23,715 मामलों का समाधान किया गया। जांच से स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे फैला संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसके लिए देशों के बीच निरंतर समन्वय और सूचना साझा करना आवश्यक है।
अभियान के दौरान इंटरपोल ने अपने विशेष भुगतान हस्तक्षेप तंत्र I-GRIP का भी उपयोग किया, जिसके माध्यम से विभिन्न देशों के बीच भेजी जा रही संदिग्ध धनराशि को समय रहते रोकने में सफलता मिली। इस प्रणाली ने कई मामलों में बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट तक रकम पहुंचने से पहले ही लेनदेन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्रवाई के दौरान कई देशों में चौंकाने वाले खुलासे भी हुए। एक स्थान पर ठगी के लिए नकली पुलिस स्टेशन तैयार कर लोगों को वीडियो कॉल के जरिए डराया जाता था, जबकि दूसरे मामले में रोमांस स्कैम के जरिए करोड़ों डॉलर का लेनदेन क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से छिपाने का प्रयास किया गया। कई स्थानों से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य अहम साक्ष्य भी बरामद किए गए, जिनके आधार पर आगे की जांच जारी है।
इस अभियान में कई अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठनों ने भी सहयोग दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर और क्रिप्टो आधारित मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध लगातार नए रूप ले रहे हैं। ऐसे में विभिन्न देशों की संयुक्त कार्रवाई ही इन संगठित नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे मजबूत माध्यम बन सकती है। इंटरपोल ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में सदस्य देशों के साथ तकनीकी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त अभियानों के माध्यम से वैश्विक साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत किया जाएगा।