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शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव


नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत वैश्विक संकेतों के मिले-जुले रुख के बीच लगभग सपाट स्तर पर की। शुरुआती कारोबार में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जिससे शुरुआती गति सीमित रही।

सुबह के शुरुआती सत्र में सेंसेक्स में हल्की मजबूती देखी गई और यह मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी सीमित बढ़त के साथ हरे निशान में बना रहा। हालांकि इस दौरान लार्जकैप शेयरों में स्थिरता देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि थोड़ी कमजोर रही।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और ऑटो सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट देने का काम किया। इन सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी को सहारा मिला। इसके अलावा सर्विसेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर भी सकारात्मक दायरे में रहे। इसके विपरीत डिफेंस, मेटल, कमोडिटीज, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जिससे समग्र बाजार में असंतुलित रुझान बना रहा।

वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के कई प्रमुख बाजारों में कमजोरी का रुख देखने को मिला, जबकि कुछ बाजारों में हल्की मजबूती बनी रही। अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी तेजी के साथ बंद होकर सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन एशियाई बाजारों की सुस्ती ने भारतीय बाजार की दिशा को सीमित रखा। इसी कारण घरेलू निवेशकों ने भी शुरुआत में सतर्क रुख अपनाया।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों में बदलाव भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत रहा। लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी लगातार निवेश जारी रखा, जो बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित हुआ।

इसके अलावा आर्थिक मोर्चे पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी बाजार की धारणा पर देखा गया। ईंधन कीमतों में वृद्धि से महंगाई और लागत दबाव को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले दिनों में उपभोक्ता आधारित सेक्टरों पर पड़ सकता है।

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