मैल्कम एक्स का जन्म 19 मई 1925 को अमेरिका के नेब्रास्का राज्य के ओमाहा शहर में हुआ था। उनका वास्तविक नाम मैल्कम लिटिल था। बचपन से ही उन्होंने नस्लभेद और हिंसा का सामना किया। उनके पिता अश्वेत अधिकारों के समर्थक थे, जिनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजरता रहा।
युवावस्था में मैल्कम एक्स अपराध की दुनिया में भी शामिल हुए और उन्हें जेल की सजा हुई। जेल में रहते हुए उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और इस्लाम धर्म से प्रभावित हुए। यहीं से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने अपने नाम के साथ “X” जोड़ा, जो उनके खोए हुए अफ्रीकी मूल और पहचान का प्रतीक माना गया।
जेल से रिहा होने के बाद मैल्कम एक्स अश्वेत समुदाय के अधिकारों के लिए सक्रिय हो गए। उन्होंने अमेरिका में अश्वेत लोगों के साथ हो रहे भेदभाव, हिंसा और अन्याय के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। उनके भाषण बेहद प्रभावशाली माने जाते थे और लाखों लोग उनसे प्रेरित हुए।
मैल्कम एक्स का मानना था कि अश्वेत समुदाय को आत्मसम्मान और आत्मरक्षा का अधिकार है। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बराबरी की मांग की। हालांकि उनके विचार कई बार विवादों में भी रहे, लेकिन उन्होंने नस्लीय अन्याय के खिलाफ संघर्ष को नई दिशा दी।
1964 में मक्का की यात्रा के बाद उनके विचारों में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने सभी नस्लों के बीच भाईचारे और मानवता की बात करनी शुरू की। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाई।
21 फरवरी 1965 को न्यूयॉर्क में एक सभा के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी मौत के बाद भी उनके विचार और संघर्ष दुनिया भर में लोगों को प्रेरित करते रहे।
मैल्कम एक्स दिवस के अवसर पर अमेरिका और कई अन्य देशों में सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम, चर्चाएं और मानवाधिकार अभियानों का आयोजन किया जाता है। लोग उनके जीवन, संघर्ष और विचारों को याद करते हैं। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में भी सामाजिक न्याय, नस्लीय समानता और मानवाधिकारों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मैल्कम एक्स ने दुनिया को यह सिखाया कि अन्याय और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उनका जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और बदलाव की मिसाल माना जाता है।
मैल्कम एक्स दिवस केवल एक व्यक्ति को याद करने का दिन नहीं, बल्कि यह समानता, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के लिए जारी संघर्ष को मजबूत करने का संदेश भी देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज में हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।