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मानसून ने दी मध्य प्रदेश में दस्तक, कई जिलों में शुरू हुई बारिश; मौसम विभाग ने जारी किया तेज हवाओं और गरज-चमक का चेतावनी संदेश


मध्य प्रदेश: में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने बुधवार को राज्य में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी। इस बार मानसून सामान्य तिथि से नौ दिन देरी से प्रदेश पहुंचा है, जिससे किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी राहत की उम्मीद जगी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेगा और वर्षा गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

मौसम विभाग के अनुसार मानसून ने बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश किया है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी जिलों में मानसून की सक्रियता के साथ ही कई क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। विशेष रूप से बैतूल और बुरहानपुर में मानसून की पहली बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में ठंडक महसूस की गई।

मानसून के आगमन के साथ मौसम विभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। हरदा, बैतूल, खंडवा, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बुरहानपुर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ वर्षा की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, उज्जैन, इंदौर, देवास, सीहोर, शाजापुर, खरगोन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, रीवा, मऊगंज और सिंगरौली समेत अनेक जिलों में भी मौसम के सक्रिय बने रहने का अनुमान है।

पिछले 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ दिखाई दिया। कुल 39 जिलों में तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां दर्ज की गईं। कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ आंधी चली, जबकि बालाघाट जिले में ओलावृष्टि की भी सूचना मिली। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में वर्षा का दायरा और अधिक विस्तृत होगा।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी गर्मी का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया में हीटवेव की स्थिति बने रहने की चेतावनी जारी की है। वहीं प्रदेश के कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। दतिया में सर्वाधिक 42.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि ग्वालियर में भी तापमान 40 डिग्री के पार रहा।

सोमवार और मंगलवार को प्री-मानसूनी गतिविधियों ने प्रदेश के मौसम को पूरी तरह बदल दिया। धार में लगभग दो इंच वर्षा दर्ज की गई, जबकि भोपाल में पौन इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर और सीहोर सहित कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। इससे खेती-किसानी की गतिविधियों को गति मिलेगी और जलाशयों में जलस्तर बढ़ने की संभावना भी बनेगी। प्रदेश के किसानों के लिए यह बारिश खरीफ सीजन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समय पर और पर्याप्त वर्षा होने से सोयाबीन, धान, मक्का तथा अन्य खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी।

मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। वर्ष 2021 में मानसून 9 जून को ही प्रदेश पहुंच गया था, जबकि वर्ष 2018 में इसकी सबसे देर से एंट्री 25 जून को दर्ज की गई थी। पिछले वर्ष मानसून 16 जून को पहुंचा था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी।

फिलहाल मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज होगी। इसके साथ ही आंधी, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां भी जारी रह सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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