MP Administrative Tribunal : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार 23 साल बाद एक बार फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (State Administrative Tribunal) शुरू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े करीब साढ़े चार लाख मामले लंबित हैं। इन्हीं मामलों के बढ़ते बोझ को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई है। दोनों के बीच सहमति बनने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को ट्रिब्यूनल के गठन की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग अब इसके कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर काम कर रहा है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था कर्मचारियों से जुड़े मामलों के समाधान को आसान और तेज बनाएगी।
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हाईकोर्ट का दबाव कम करने की कोशिश
सरकार का मानना है कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बनने से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और उसकी इंदौर एवं ग्वालियर खंडपीठों पर मामलों का दबाव कम होगा। वर्तमान में भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन, वरिष्ठता और सेवा शर्तों से जुड़े हजारों मामले अदालतों में लंबित हैं। यदि इन मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में होने लगेगी तो हाईकोर्ट को अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
कर्मचारियों को मिल सकती है राहत
ट्रिब्यूनल बनने से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने सेवा संबंधी विवादों के समाधान के लिए अलग मंच मिलेगा। इससे मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। लंबे समय से लंबित भर्ती, प्रमोशन, वेतन विसंगति और पेंशन से जुड़े मामलों को जल्द सुनवाई का अवसर मिल सकता है। इससे कर्मचारियों को न्याय पाने में आसानी होगी।
2003 में समाप्त हुआ था ट्रिब्यूनल
मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को वर्ष 2001 में बंद करने का निर्णय लिया गया था। उस समय दिग्विजय सिंह सरकार ने राज्य के पुनर्गठन और प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए इसे समाप्त करने का फैसला लिया था। इसके बाद राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने 17 अप्रैल 2003 को अधिसूचना जारी कर ट्रिब्यूनल को आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया था।
अब फिर शुरू करने की तैयारी
करीब 23 साल बाद राज्य सरकार एक बार फिर इस व्यवस्था को शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यदि ट्रिब्यूनल का गठन होता है तो यह सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। साथ ही न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते बोझ को कम करने में भी मदद मिलेगी। आने वाले समय में सरकार इस संबंध में औपचारिक घोषणा और आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।