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म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा


नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।

डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया।

ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे।

अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।

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