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सीधी बातचीत नहीं, लेकिन बातचीत जारी ईरान-अमेरिका संकट में पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक प्रयास तेज


नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बातचीत की संभावना बनती दिखाई दे रही है, हालांकि इस बार दोनों देश सीधे बातचीत से दूरी बनाए रखते हुए अप्रत्यक्ष माध्यमों का सहारा ले सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच के रूप में उभरता दिख रहा है।

जानकारी के अनुसार ईरान से एक प्रतिनिधिमंडल पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुका है जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के भी वहां पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह बातचीत किसी औपचारिक सीधी बैठक के बजाय मध्यस्थों के जरिए आगे बढ़ सकती है।

ईरान ने पहले अमेरिका के साथ सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया था जिसके चलते पिछले दौर की वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी थी। हालांकि बाद में क्षेत्रीय दबाव और सीजफायर से जुड़े मुद्दों के चलते दोनों पक्षों ने फिर से संवाद की संभावना तलाशनी शुरू की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में अब्बास अराघची की भूमिका महत्वपूर्ण है जो क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य सीधी बातचीत से ज्यादा क्षेत्रीय समन्वय और मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशना बताया जा रहा है।

दूसरी तरफ अमेरिकी पक्ष से भी वरिष्ठ प्रतिनिधियों की सक्रियता देखी जा रही है जिनमें ट्रंप प्रशासन से जुड़े सलाहकार और दूत शामिल हैं। हालांकि दोनों देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल किसी औपचारिक आमने-सामने बैठक की योजना नहीं है।

इस बीच क्षेत्रीय तनाव भी बना हुआ है जहां समुद्री मार्गों और जहाजों को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति देखी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

पिछले दौर की बातचीत में ओमान जैसे देशों की मध्यस्थता अहम रही थी और अब भी उम्मीद की जा रही है कि पाकिस्तान सहित कुछ अन्य क्षेत्रीय देश इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।

व्हाइट हाउस की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है लेकिन अंतिम निर्णय परिस्थितियों और प्रगति पर निर्भर करेगा। वहीं ईरान का रुख अब भी यह है कि वह सीधे नहीं बल्कि मध्यस्थों के जरिए ही अपनी बात रखेगा।

कुल मिलाकर मौजूदा स्थिति में तनाव और बातचीत दोनों साथ-साथ चलते दिखाई दे रहे हैं जहां एक ओर टकराव की आशंका बनी हुई है वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की हल्की उम्मीद भी जिंदा है।

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