हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित ‘Faith-AI Covenant Roundtable’ में हिंदू टेंपल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका, सिख कोएलिशन और बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधियों समेत कई धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक का आयोजन जिनेवा स्थित इंटरफेथ एलायंस ने किया था। चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह था कि धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्य AI के व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता को किस तरह बेहतर बना सकते हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI अब केवल डेटा और एल्गोरिद्म तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में AI इंसानी जीवन के हर हिस्से में शामिल होगा, इसलिए उसे नैतिक फैसले लेने की समझ भी होनी चाहिए। यही कारण है कि Anthropic जैसी कंपनियों ने दार्शनिकों और धर्मगुरुओं की मदद से अपने AI मॉडल के लिए “Claude Constitution” जैसे नैतिक नियम तैयार किए हैं।
कंपनियों का मानना है कि हजारों वर्षों से धर्म मानव समाज को नैतिकता, करुणा, संतुलन और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाते आए हैं। ऐसे में AI को भी इन मूल्यों से जोड़ना जरूरी हो गया है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अलग-अलग धर्मों के मूल्य और दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं, इसलिए AI के लिए सार्वभौमिक नैतिक नियम तैयार करना आसान नहीं होगा।
धार्मिक संगठनों ने भी साफ किया है कि AI कभी इंसानी चेतना या ईश्वरीय ज्ञान की जगह नहीं ले सकता, लेकिन यह शिक्षा, मार्गदर्शन और समाज कल्याण का मजबूत माध्यम जरूर बन सकता है। न्यूयॉर्क के बाद अब बीजिंग, नैरोबी और अबू धाबी में भी ऐसी चर्चाओं की तैयारी की जा रही है, ताकि AI तकनीक को अधिक जिम्मेदार, सुरक्षित और मानवता के हित में विकसित किया जा सके।