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BU के नाम बदलने पर छात्रों की दो टूक: ‘नाम नहीं, सुविधाएं बदलें’; बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया


मध्‍य प्रदेश । भोपाल स्थित Barkatullah University का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ किए जाने के प्रस्ताव ने छात्रों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। राज्य सरकार की ओर से सामने आए इस प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अधिकांश छात्रों का मानना है कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाली शिक्षा, शोध कार्य और सुविधाओं से बनती है।

छात्रों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर हो, समय पर परीक्षाएं हों, परिणाम घोषित किए जाएं और शोध के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो इससे विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिलेगा। कई छात्रों ने यह भी कहा कि नाम परिवर्तन की बजाय प्रशासन को कैंपस की बुनियादी व्यवस्थाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और प्लेसमेंट सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

हालांकि कुछ छात्रों ने प्रस्तावित नाम परिवर्तन का समर्थन भी किया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम स्थानीय इतिहास, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा होना चाहिए। ऐसे छात्रों का मानना है कि ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ नाम भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे सकता है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव की चर्चा हो रही है। स्थापना के समय इसका नाम ‘भोपाल यूनिवर्सिटी’ था। बाद में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी Maulana Barkatullah के सम्मान में इसका नाम बदलकर बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी रखा गया था। अब एक बार फिर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सामने आने से बहस तेज हो गई है।

शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का भी मानना है कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा उसके अकादमिक प्रदर्शन, शोध उपलब्धियों और छात्रों की सफलता से तय होती है। ऐसे में नाम परिवर्तन के साथ-साथ संस्थान की गुणवत्ता और संसाधनों को बेहतर बनाने पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

फिलहाल प्रस्ताव को लेकर छात्रों और आम लोगों के बीच चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में सरकार इस विषय पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। लेकिन छात्रों का एक बड़ा वर्ग यही संदेश दे रहा है कि विश्वविद्यालय की असली पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि उसके काम और उपलब्धियों से बनती है।

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