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ताश के पत्तों की तरह ढह रहा विपक्ष का किला… राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के करीब BJP


नई दिल्ली।
दो साल पहले हुए लोकसभा चुनावों (Lok Sabha elections) में भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को कड़ी टक्कर देने वाला विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन आज अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। आंतरिक कलह, हालिया चुनावी हार और घटक दलों के पाला बदलने के कारण लोकसभा में विपक्ष का आंकड़ा 200 के नीचे गिरने की कगार पर पहुंच गया है। विपक्ष के रणनीतिकारों को डर है कि इस बिखराव के बाद संसद के भीतर सरकार के विधायी और राजनीतिक एजेंडे को चुनौती देने की विपक्ष की बची-कुची क्षमता भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

संसद के भीतर इंडिया गठबंधन (India Alliance) का किला ताश के पत्तों की तरह ढहता नजर आ रहा है। 22 सांसदों वाली डीएमके और 3 सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (AAP) ने हाल ही में इंडिया का साथ छोड़ दिया। इससे इंडिया गठबंधन की लोकसभा में ताकत 2024 के 234 से घटकर पहले ही 209 पर आ चुकी है। अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 29 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई के बागी होने की खबरों ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। अगर ऐसा होता है तो विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 190 के भी नीचे चला जाएगा।


भाजपा की नजर पूर्ण बहुमत पर

विपक्ष के इस पतन से उत्साहित होकर भाजपा लोकसभा में अपने दम पर साधारण बहुमत 272 का आंकड़ा पार करने की रणनीति बना रही है। फिलहाल भाजपा के यहां 240 सांसद हैं। अगर टीएमसी के सांसदों का विलय हो जाता है तो भाजपा का यह आंकड़ा बहुमत के काफी करीब पहुंच जाएगा। वहीं, संकट सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों के बीच विभाजन की पूरी संभावना है। हाल ही में आम आदमी पार्टी में भी यह देखा गया। इन बदलते समीकरणों के कारण राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच रहा है।

इंडिया गठबंधन के कुछ पदाधिकारियों को डर है कि इस मजबूती से उत्साहित होकर सत्तारूढ़ गठबंधन (NDA) विपक्ष के अन्य कमजोर या असंतुष्ट धड़ों को भी अपने पाले में लाने के लिए प्रेरित हो सकता है।


महिला आरक्षण और परिसीमन बिल की वापसी तय

दोनों सदनों में सरकार का विधायी रास्ता पूरी तरह साफ होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने कई महत्वाकांक्षी और लंबित विधेयकों को तेजी से आगे बढ़ाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह केवल समय की बात है कि सरकार महिला आरक्षण में संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को दोबारा संसद में पेश कर पास करा लेगी, जिन्हें पिछले सत्र में इंडिया गठबंधन ने एकजुट होकर रोक दिया था।


हार का सिंड्रोम और कांग्रेस पर आरोप

सोमवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में जमकर आरोप-प्रत्यारोप और घोर निराशा का माहौल देखा गया। विपक्षी नेताओं का यह गुस्सा और हताशा लगातार मिली चुनावी शिकस्त का नतीजा है। 2024 के आम चुनाव के बाद विपक्ष को हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस राजनीतिक कुप्रबंधन के चलते क्षेत्रीय दलों खासकर TMC, RJD, DMK, शिवसेना-UBT, एनसीपी-शरदचंद्र पवार, आप और लेफ्ट का कांग्रेस के नेतृत्व की क्षमता पर से भरोसा उठ गया है।


अब सिर्फ 6 राज्यों में बची INDIA की सत्ता

लगातार मिली हार के बाद अब ‘इंडिया’ गठबंधन का शासन देश के गिने-चुने राज्यों में ही सिमट कर रह गया है। उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में विपक्ष की सरकार है। वहीं, दक्षिण भारत में कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में कांग्रेस सत्ता में है।

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