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ग्वालियर में मेधावी सपनों का दर्दनाक अंत: 11वीं की छात्रा ने खुद को मारी गोली, सुसाइड नोट में लिखा- 'नहीं कर सकी परिवार का नाम रोशन'


ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने आधुनिक शिक्षा प्रणाली और बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के घोसीपुरा इलाके में रहने वाली 17 वर्षीय छात्रा ट्विंकल ने परीक्षा में कम अंक आने के अवसाद में आकर मौत को गले लगा लिया। आईटीबीपी (ITBP) जवान की बेटी ने बुधवार तड़के अपने ही घर में पिता की लाइसेंसी पिस्तौल से खुद के सीने में गोली मार ली। जब तक परिजन उसे अस्पताल ले जाते, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।

सपनों का बोझ और एक घातक फैसला
घटना बुधवार सुबह करीब 7 बजे की है। गिरराज जी मंदिर के पास रहने वाले श्याम कुमार अहिरवार के घर में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक एक धमाके ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। ट्विंकल अपनी मां के साथ सोई थी, लेकिन सुबह उठकर वह दूसरे कमरे में चली गई। जैसे ही गोली चलने की आवाज आई, परिजन बदहवास होकर कमरे की ओर दौड़े, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से झांकने पर जो मंजर दिखा उसने सबके पैरों तले जमीन खिसका दी। ट्विंकल लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ी थी और पास ही उसके पिता की रिवॉल्वर पड़ी थी।

सुसाइड नोट: “गुड बाय… कम नंबर आए हैं”
पुलिस को मौके से छात्रा का एक रजिस्टर मिला है, जो अब उसकी आखिरी याद बन गया है। इस रजिस्टर में अंग्रेजी में लिखे चार लाइनों के सुसाइड नोट ने पुलिस और परिजनों की आंखों में आंसू ला दिए। ट्विंकल ने लिखा, “मेरे कम मार्क्स आए हैं। मैं परिवार का नाम रोशन नहीं कर सकी, इसलिए यह कदम उठा रही हूं। गुड बाय।” यह चंद शब्द बताते हैं कि एक किशोर मन पर ‘सफलता’ का कितना भारी दबाव था कि उसने जीवन को ही हार मान लिया। दो दिन पहले आए 11वीं के रिजल्ट ने उसे इतना तोड़ दिया था कि उसने अपनी प्रतिभा और भविष्य की जगह मौत को चुनना बेहतर समझा।

जांच में जुटी पुलिस और फोरेंसिक टीम
घटना की सूचना मिलते ही बहोड़ापुर थाना प्रभारी और सीएसपी कृष्णपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और फिंगरप्रिंट टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने वह रजिस्टर और हथियार जब्त कर लिया है जिससे छात्रा ने खुदकुशी की। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट है कि छात्रा रिजल्ट के बाद से ही गुमसुम थी और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही थी।

यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों की उपलब्धियों को केवल अंकों के तराजू पर तौलने की प्रवृत्ति आज मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है। ग्वालियर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संवाद की कमी और ‘नाम रोशन’ करने का अनकहा दबाव किसी भी हंसते-खेलते घर का चिराग बुझा सकता है।

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