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नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला


नई दिल्ली । NEET री एग्जाम के पहले सरकार पूरी ताकत झोंक रही है. बार बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद इस परीक्षा को सुचारू और पारदर्शी तरीके से कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. इस बार देश भर में लाखों छात्र छात्राएं शामिल हो रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि किसी भी छात्र को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया जिसने सभी का ध्यान खींचा है. प्रधानमंत्री दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे. यहां से उन्हें अपने आवास के लिए रवाना होना था. लेकिन उन्होंने तत्काल प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी.

अगर पीएम का काफिला उस समय एयरपोर्ट से निकलता तो राजधानी की कई सड़कों पर यातायात रोकना पड़ता. उसी समय हजारों छात्र नीट परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे थे. इससे छात्रों को देरी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता था.

ऐसे में प्रधानमंत्री ने निर्णय लिया कि वे एयरपोर्ट पर ही रुकेंगे. उन्होंने अपने काफिले को वहीं रोक दिया. बताया जा रहा है कि वे तब तक एयरपोर्ट पर रहे जब तक परीक्षा शुरू नहीं हुई. इसके बाद ही वे अपने आवास के लिए रवाना हुए.

देश भर में इस बार नीट परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा किया जा रहा है. परीक्षा में कुल 22.79 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं. यह परीक्षा देश के साथ साथ विदेशों के कुछ केंद्रों पर भी आयोजित की गई है. कुल 551 शहरों और 14 विदेश शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. लगभग 5000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा संपन्न हो रही है.

परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. हर केंद्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और जैमर का उपयोग किया जा रहा है. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके.

इस पूरे आयोजन में दो लाख से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है. सैकड़ों सिटी कोऑर्डिनेटर और हजारों ऑब्जर्वर भी तैनात किए गए हैं जो परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो.

छात्रों के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमित सीटों के कारण प्रतिस्पर्धा काफी कठिन है. ऐसे में सरकार और प्रशासन दोनों का प्रयास है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए. प्रधानमंत्री का यह निर्णय भी इसी दिशा में एक संवेदनशील कदम के रूप में देखा जा रहा है.

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