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रिटायर्ड अधिकारी की एजेंसी पर सवाल: भोपाल में जांच तेज, जल्द दर्ज हो सकता है मामला


राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियों की जांच में चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आई हैं। जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद की बीएस एचपी गैस एजेंसी की जांच पूरी होने के बाद खाद्य विभाग ने रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंप दी है। मामले में बड़ी संख्या में सिलेंडर गायब मिलने, फर्जी बिलिंग और उपभोक्ताओं से अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। अब संबंधित एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

हजारों सिलेंडर गायब, स्टॉक में भारी गड़बड़ी

जांच में सामने आया कि फीनिक्स एजेंसी में 350 घरेलू, 350 कमर्शियल और करीब 2 हजार छोटे (5 किलोग्राम) सिलेंडर गायब हैं। वहीं बीएस एजेंसी के गोदाम में भी 254 भरे सिलेंडर नहीं मिले। दोनों एजेंसियों का साझा गोदाम करीब 36 हजार वर्गफीट क्षेत्र में संचालित पाया गया। खास बात यह है कि इनमें से एक एजेंसी खाद्य विभाग के रिटायर्ड अधिकारी और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी बताई जा रही है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचे सिलेंडर

सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन गैस सिलेंडर बुक किए, लेकिन उन्हें सिलेंडर डिलीवर नहीं किए गए। इसके बावजूद उनके मोबाइल पर ‘डिलीवर’ का मैसेज भेज दिया गया। जांच में पाया गया कि ऐसे सिलेंडर डिलीवरी बॉय द्वारा अन्य जगहों पर ऊंचे दामों में बेच दिए गए। एजेंसी की सफाई कि “उपभोक्ता घर पर नहीं मिले” पूरी तरह गलत साबित हुई।

कैश एंड कैरी और फर्जी चार्ज से लाखों की वसूली

एजेंसी ने उपभोक्ताओं से होम डिलीवरी चार्ज लेने के बावजूद सिलेंडर एजेंसी से ही लेने को मजबूर किया। नियम के अनुसार ऐसी स्थिति में 34 रुपए कम लिए जाने चाहिए थे, लेकिन पूरा पैसा वसूला गया। इसके अलावा ‘सुरक्षा निरीक्षण’ के नाम पर प्रति उपभोक्ता 238 रुपए का फर्जी चार्ज लिया गया, जबकि कोई निरीक्षण किया ही नहीं गया। अनुमान है कि करीब 5 हजार उपभोक्ताओं से लगभग 10 लाख रुपए की अवैध वसूली की गई।

OTP सिस्टम में गड़बड़ी, सप्लाई भी रोकी गई

जांच में यह भी सामने आया कि एजेंसी ने ओटीपी सिस्टम का पालन नहीं किया और बिना ओटीपी के ही सिलेंडर की बिक्री दर्ज कर ली। इसके कारण हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एजेंसी की सप्लाई रोक दी थी। साथ ही ट्रकों की आवाजाही में भी संदिग्ध देरी पाई गई, जिससे बीच रास्ते में सिलेंडरों के हेरफेर की आशंका जताई जा रही है।

अन्य अनियमितताएं भी उजागर

जांच के दौरान कई अन्य गंभीर खामियां सामने आईं जैसे 2 हजार से अधिक ऑनलाइन बुकिंग लंबित रहना, डिलीवरी वाहनों की संख्या कम होना, गोदाम में स्टॉक और रेट लिस्ट का प्रदर्शन न होना और आवासीय क्षेत्र के पास अवैध तरीके से गोदाम संचालित करना। यह सभी नियमों का खुला उल्लंघन है।

जल्द होगी सख्त कार्रवाई

खाद्य विभाग ने 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट एडीएम को सौंप दी है। अब एजेंसी संचालकों पर जुर्माना, एफआईआर और लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई हो सकती है। कलेक्टर स्तर से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित गैस कंपनियों को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

उपभोक्ताओं के साथ बड़ा धोखा

यह मामला न सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी का है, बल्कि उपभोक्ताओं के भरोसे के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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