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सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी गिरावट, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकीं


नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा गया। बाजार में आई इस गिरावट के बाद निवेशकों और कारोबारियों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,539 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसका भाव 1,56,072 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले यह कीमत 1,57,611 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी सस्ता होकर 1,42,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि पहले यह 1,44,372 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,17,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

चांदी के बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का भाव 5,296 रुपये प्रति किलो कम होकर 2,60,917 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले यह 2,66,213 रुपये प्रति किलो था। चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि एक ही दिन में इतनी बड़ी कमी को निवेशक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं।

वायदा बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी दोनों के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई है। 5 जून 2026 के लिए सोने का कॉन्ट्रैक्ट और 3 जुलाई 2026 के लिए चांदी का कॉन्ट्रैक्ट दोनों ही दबाव में रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए हैं।

वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर भी कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई है, जहां सोना और चांदी दोनों में प्रतिशत के आधार पर गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिका में आने वाले महंगाई और जीडीपी से जुड़े आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की दिशा तय होगी। इन आंकड़ों के जारी होने से वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय प्रतीक्षा की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक डेटा इस रुझान को और स्पष्ट कर सकता है और सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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