मोरंग जिला सुरक्षा समिति के फैसले के बाद सीमा पर आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच शुरू कर दी गई है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी सरोज कोइराला ने साफ किया कि यह फैसला किसी द्विपक्षीय समझौते के तहत नहीं बल्कि नेपाल की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि खुली सीमा का फायदा उठाकर अवैध घुसपैठिए और अपराधी नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए सतर्कता बढ़ाना जरूरी हो गया है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों के बाद रोहिंग्या मुसलमान नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है। नेपाली मीडिया ने भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सीमा से लगे इलाकों में लोगों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर अलर्ट मोड में हैं।
नेपाल प्रशासन ने खासतौर पर ट्रेनों के आने के समय अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं, क्योंकि उस दौरान बड़ी संख्या में लोग सीमा पार करते हैं। जानकारी के मुताबिक एक साथ 500 से 1000 लोगों की आवाजाही होने पर पहचान पत्रों की जांच की जा रही है। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड भी तैनात किए गए हैं ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना है कि सीमा पार फरार अपराधियों की आवाजाही रोकना भी इस अभियान का बड़ा उद्देश्य है। रिपोर्ट्स के अनुसार नेपाल के कई फरार कैदियों के भारत में छिपे होने की आशंका है, जिन्हें पकड़ने के लिए सीमा निगरानी मजबूत की गई है। फिलहाल यह फैसला जिला स्तरीय सुरक्षा समिति द्वारा लागू किया गया है और इसे नेपाल की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।