मैच की शुरुआत से ही जापान ने आक्रामक रुख अपनाया और विपक्षी टीम पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसका नतीजा जल्द ही देखने को मिला, जब अयासे उएदा ने शानदार हेडर लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। उनकी यह छलांग और सटीक फिनिशिंग ट्यूनीशिया के डिफेंडरों के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित थी।
इसके बाद जापान ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। चौथे मिनट में कीटो नाकामुरा ने पेनल्टी बॉक्स में तेजी दिखाते हुए गेंद को दाइची कामदा तक पहुंचाया, जिन्होंने बिना देर किए उसे गोल में बदल दिया। यह गोल फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में किसी जापानी खिलाड़ी द्वारा किया गया सबसे तेज गोल बन गया।
पहले हाफ में जापान का दबदबा पूरी तरह से कायम रहा। 31वें मिनट में एक बार फिर अयासे उएदा ने शानदार मूव बनाते हुए अपना दूसरा गोल दागा और टीम को 2-0 से मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। ट्यूनीशिया की टीम इस दबाव से उबर ही नहीं सकी और लगातार डिफेंस में उलझी रही।
दूसरे हाफ में भी जापान ने अपने खेल की गति कम नहीं की। 69वें मिनट में जुन्या इतो ने बेहतरीन स्लाइडिंग फिनिश के जरिए तीसरा गोल दागा, जिससे ट्यूनीशिया की वापसी की उम्मीदें पूरी तरह खत्म हो गईं। इसके बाद 83वें मिनट में अयासे उएदा ने अपना दूसरा और मैच का चौथा गोल कर जापान की जीत पर मुहर लगा दी।
इस मैच में उएदा का प्रदर्शन सबसे ज्यादा प्रभावशाली रहा। उन्होंने दो गोल दागकर इतिहास रच दिया और फीफा वर्ल्ड कप के एक ही मैच में दो गोल करने वाले पहले जापानी खिलाड़ी बन गए। उनकी आक्रामकता और सटीक फिनिशिंग ने जापान की जीत को आसान बना दिया।
इस जीत के साथ Japan ने न केवल नॉकआउट स्टेज में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि एशियाई टीमें अब विश्व फुटबॉल में किसी से कम नहीं हैं। खास बात यह रही कि जापान ने एएफसी इतिहास का एक नया रिकॉर्ड भी बना दिया, क्योंकि किसी भी एशियाई टीम ने वर्ल्ड कप में एक मैच में चार गोल पहले कभी नहीं किए थे।
दूसरी ओर, इस हार के साथ Tunisia का टूर्नामेंट सफर समाप्त हो गया है। टीम पूरे मैच में संघर्ष करती नजर आई, लेकिन जापान की गति और रणनीति के सामने वह पूरी तरह बेबस दिखी। यह मुकाबला वर्ल्ड कप इतिहास में जापान की सबसे बड़ी जीतों में से एक बन गया है और आने वाले मैचों के लिए टीम के आत्मविश्वास को और मजबूत कर गया है।