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इंडस्ट्री की चमक के पीछे का कड़वा सच कैरेक्टर आर्टिस्ट्स के साथ होता है भेदभाव


नई दिल्ली  । बॉलीवुड और टेलीविजन इंडस्ट्री की चमक दमक दूर से जितनी आकर्षक दिखाई देती है वास्तविकता उतनी ही अलग और कई बार चौंकाने वाली होती है। पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाले कई कलाकारों को पर्दे के पीछे सम्मान और सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। हाल ही में वेब सीरीज पंचायत में क्रांति देवी का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुईं अभिनेत्री सुनीता राजवार और अभिनेता जतिन नेगी ने इंडस्ट्री के इसी कड़वे सच को सामने रखा है।

एक बातचीत के दौरान दोनों कलाकारों ने बताया कि फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कलाकारों के साथ उनकी भूमिका और लोकप्रियता के आधार पर व्यवहार किया जाता है। जतिन नेगी का कहना है कि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को तब तक पूरा सम्मान नहीं मिलता जब तक वे परेश रावल या अनुपम खेर जैसे बड़े नाम न बन जाएं। उन्होंने बताया कि बड़े कलाकारों को कई वैनिटी वैन और पूरा स्टाफ उपलब्ध कराया जाता है जबकि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को सीमित सुविधाएं मिलती हैं। कई बार उन्हें अन्य कलाकारों के साथ वैनिटी वैन साझा करनी पड़ती है।

जतिन ने कहा कि छोटे और बैकग्राउंड कलाकारों की स्थिति और भी मुश्किल होती है। उन्हें कई कलाकारों के साथ एक ही वैन शेयर करनी पड़ती है और अक्सर बुनियादी सुविधाओं के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार कलाकारों को उनके काम का भुगतान 90 दिनों बाद मिलता है जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ जाती हैं।

अभिनेत्री सुनीता राजवार ने भी सेट पर होने वाले भेदभाव को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यदि कोई कलाकार लीड रोल में होता है तो पूरा सेट उसी के इर्द गिर्द घूमता है। उसे बेहतर कमरे बेहतर सुविधाएं और पूरा सहयोग मिलता है। वहीं छोटे किरदार निभाने वाले कलाकारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार स्पॉटबॉय तक उन्हें महत्व नहीं देते।

जतिन नेगी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब वह बैकग्राउंड रोल कर रहे थे और सेट पर उन्हें खाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में कलाकारों को ए बी और सी कैटेगरी में बांट दिया जाता है। वरिष्ठ और लोकप्रिय कलाकारों के लिए अलग भोजन व्यवस्था होती है जबकि जूनियर और बैकग्राउंड कलाकारों को अलग सेक्शन में खाना दिया जाता है।

उन्होंने एक पुराना अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक शूटिंग के दौरान उन्हें उनके गेटअप की वजह से खाने के सेक्शन में प्रवेश नहीं दिया गया। काफी देर तक समझाने और प्रोडक्शन टीम से संपर्क करने के बाद उन्हें खाना मिला। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्हें समाज से अलग कर दिया गया हो। इतना ही नहीं अलग-अलग कैटेगरी के कलाकारों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता में भी बड़ा अंतर होता है।

दोनों कलाकारों का मानना है कि इंडस्ट्री में यह भेदभाव केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है बल्कि सम्मान और व्यवहार में भी साफ दिखाई देता है। उनका कहना है कि प्रतिभा और मेहनत के आधार पर सभी कलाकारों को बराबरी का सम्मान मिलना चाहिए क्योंकि किसी भी फिल्म या शो की सफलता में हर कलाकार का योगदान महत्वपूर्ण होता है।

इन खुलासों ने एक बार फिर मनोरंजन जगत की उस सच्चाई को सामने ला दिया है जिस पर अक्सर चर्चा कम होती है। दर्शकों के लिए पर्दे पर दिखने वाली भव्य दुनिया के पीछे कई ऐसे कलाकार हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष के साथ-साथ असमानता का भी सामना कर रहे हैं।

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