यह मिसाइल विशेष रूप से नौसैनिक हेलीकॉप्टरों के लिए तैयार की गई है, जो इसे अत्यंत लचीला और खतरनाक हथियार बनाती है। तकनीकी बारीकियों की बात करें तो यह मिसाइल ‘इमेजिंग इन्फ्रा-रेड’ (IIR) सीकर तकनीक से लैस है। यह आधुनिक तकनीक मिसाइल को अंधेरे या खराब मौसम में भी दुश्मन के जहाज की ऊष्मा (heat) को पहचान कर उस पर सटीक निशाना लगाने की अनुमति देती है।
लगभग 55 किलोमीटर की मारक दूरी तय करने वाली यह मिसाइल हवा में 0.8 मैक की रफ्तार से दौड़ती है, जो ध्वनि की गति के करीब है। इसका 385 किलोग्राम का वजन और 100 किलोग्राम का शक्तिशाली विस्फोटक वारहेड किसी भी मध्यम श्रेणी के युद्धपोत को पल भर में जलसमाधि देने के लिए पर्याप्त है।
दुश्मन के लिए यह मिसाइल एक अदृश्य काल की तरह है। इसकी सबसे बड़ी शक्ति इसकी ‘सी-स्किमिंग’ क्षमता है, जिसके तहत यह समुद्र की लहरों से मात्र 5 मीटर ऊपर उड़ती है। इतनी कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह दुश्मन के शक्तिशाली रडार की नजरों से बच निकलती है और जब तक रडार इसे देख पाता है, तब तक प्रहार हो चुका होता है।
इसके अलावा, ‘सॉल्वो लॉन्च’ की खूबी इसे और भी घातक बनाती है; यदि दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को रोकने की कोशिश भी करे, तो ठीक पीछे आती दूसरी मिसाइल लक्ष्य को भेदने में सफल रहती है। यह रणनीति दुश्मन के सुरक्षा घेरे को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए डिजाइन की गई है।
भारतीय नौसेना की आक्रमण क्षमताओं में यह इजाफा ‘आत्मनिर्भर भारत’ की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। अब तक इस तरह की मिसाइलों के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहने वाली नौसेना के पास अब अपना स्वदेशी विकल्प मौजूद है।
इसे सीकिंग और अन्य आधुनिक नौसैनिक हेलीकॉप्टरों के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे गश्ती और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी। छोटे युद्धपोतों और दुश्मन के रसद जहाजों के लिए यह मिसाइल एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। सफल परीक्षण के बाद अब इसे जल्द ही सेना के बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो हिंद महासागर और उससे परे भारत की धाक को और मजबूत करेगी।