दरअसल, ये कोई नए लॉन्च किए गए फंड नहीं हैं, बल्कि पहले से चल रहे स्थापित स्मॉलकैप फंड हैं जिन्हें कुछ समय के लिए नए निवेश के लिए बंद कर दिया गया था। ऐसे फंड आमतौर पर तब बंद किए जाते हैं जब उनमें अत्यधिक निवेश आ जाता है और फंड मैनेजर्स के लिए स्मॉलकैप कंपनियों में सही मूल्यांकन पर निवेश करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। स्मॉलकैप सेगमेंट की प्रकृति ही ऐसी होती है कि इसमें जोखिम और अस्थिरता अधिक रहती है, इसलिए फंड हाउस अक्सर निवेश प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी रूप से प्रवेश बंद कर देते हैं।
अब जब ये फंड फिर से खुल गए हैं, तो बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह निवेश के लिए सही समय है। कई नए निवेशक इसे एक अवसर मानकर तेजी से पैसा लगाने की सोच रहे हैं, खासकर SIP के माध्यम से। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ फंड के दोबारा खुलने को निवेश का संकेत मान लेना सही रणनीति नहीं है। किसी भी स्मॉलकैप फंड में निवेश से पहले उसके जोखिम, पोर्टफोलियो और लंबी अवधि की रणनीति को समझना जरूरी होता है।
ICICI Prudential और Tata जैसे बड़े फंड हाउस के स्मॉलकैप फंड्स को बाजार में एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड के लिए जाना जाता है। हालांकि स्मॉलकैप कैटेगरी अपने आप में अधिक उतार-चढ़ाव वाली होती है, इसलिए इसमें रिटर्न के साथ जोखिम भी समान रूप से मौजूद रहता है। यही कारण है कि इन फंड्स को समय-समय पर बंद और फिर से खोला जाता है ताकि निवेश संतुलन बनाए रखा जा सके।
निवेशकों के बीच बढ़ती दिलचस्पी का एक कारण यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में स्मॉलकैप स्टॉक्स ने अच्छे रिटर्न दिए हैं। इससे इस कैटेगरी के प्रति आकर्षण बढ़ा है, लेकिन बाजार चक्र हमेशा एक जैसा नहीं रहता। तेजी के बाद गिरावट का दौर भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जिसे अक्सर नए निवेशक नजरअंदाज कर देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मॉलकैप फंड में निवेश करते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए और लंबी अवधि की सोच के साथ ही कदम उठाना चाहिए। सिर्फ भीड़ के साथ चलकर निवेश करने से नुकसान की संभावना भी बढ़ सकती है। सही रणनीति, धैर्य और जोखिम समझदारी ही इस सेगमेंट में सफलता की कुंजी मानी जाती है।