ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शोभन योग में की गई पूजा-अर्चना का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस योग में भगवान गणेश की विधिवत आराधना करने से जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता और स्थिरता के योग बनते हैं। साथ ही यह माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं और रुके हुए कार्य भी पूरे होने लगते हैं।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार विनायक चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है जिन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और बुद्धि, विवेक, मान-सम्मान तथा समृद्धि में वृद्धि होती है।
ऐसा भी माना जाता है कि जो लोग लगातार असफलताओं का सामना कर रहे होते हैं उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। गणपति की कृपा से जीवन में नई दिशा और सफलता के मार्ग खुलते हैं। घर-परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनता है और मांगलिक कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
विनायक चतुर्थी की पूजा विधि भी अत्यंत सरल मानी गई है। इस दिन प्रातः स्नान कर घर के मंदिर को स्वच्छ कर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। लाल वस्त्र बिछाकर गणपति को विराजमान किया जाता है और गंगाजल से संकल्प लेकर पूजा प्रारंभ की जाती है। इसके बाद भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लड्डू और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर विधिवत आराधना की जाती है और गणेश मंत्रों का जाप तथा गणेश चालीसा का पाठ किया जाता है।
शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है जिसे पारण कहा जाता है। इस पूरी विधि से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल लेकर आती है। कुल मिलाकर विनायक चतुर्थी का यह पावन अवसर भक्तों के लिए भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय माना जाता है।