मिशन 2027 की तैयारी: सीएम मोहन यादव ने भोपाल में बुलाया चिंतन शिविर, वादों पर होगा मंथन
मध्य प्रदेश में 2027 के स्थानीय निकाय व पंचायत चुनावों से पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में दो दिवसीय चिंतन शिविर का दांव चला है। इसमें बीजेपी संकल्प पत्र के वादों और मंत्रियों के परफॉर्मेंस की समीक्षा होगी।
मध्य प्रदेश की राजनीति और सत्ता संचालन में अपनी मजबूत पकड़ बना रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब सरकार की राजनीतिक दिशा को नई धार देने जा रहे हैं। पहली बार व्यापक स्तर पर सितंबर महीने में भोपाल के भीतर दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक व प्रशासनिक बैठक में पूरी कैबिनेट और राज्य के आला अफसर शामिल होंगे। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य अपने कार्यकाल के बीते ढाई साल के कामकाज का राजनीतिक और प्रशासनिक ऑडिट करना तथा शेष ढाई साल के कार्यकाल का ठोस रोडमैप खींचना है।
बीजेपी संकल्प पत्र के वादों पर मंत्रियों की परफॉर्मेंस जांच
राजनीतिक प्राथमिकताओं को तय करने के लिए शिविर में मंत्रियों के 3 से 4 विभागों वाले छोटे समूह बनाए जाएंगे। ये समूह बीजेपी के चुनावी संकल्प पत्र में जनता से किए गए वादों के आधार पर अपने विभागों की प्रगति और चुनौतियों का विश्लेषण करेंगे। इसके जरिए पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकार के फैसलों का सीधा राजनीतिक लाभ जमीन पर दिखाई दे और अगले ढाई साल के लिए जनकल्याणकारी प्राथमिकताओं को मजबूती से लागू किया जा सके।
मंत्रियों और कलेक्टर-कमिश्नरों के बीच सीधा संवाद
प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक समन्वय को मजबूत करने के लिए इस शिविर में पहली बार जिलों के कलेक्टर और कमिश्नर भी बैठेंगे। साथ ही मंत्रालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव भी मौजूद रहेंगे। मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में सरकारी मशीनरी के कामकाज, योजनाओं के डिलीवरी सिस्टम और जनता की शिकायतों पर अधिकारियों से सीधे सवाल-जवाब करेंगे, जिससे अफसरों की जवाबदेही तय हो सके।
पचमढ़ी का वीआईपी कल्चर छोड़ भोपाल को चुना
राजनीतिक विश्लेषक आयोजन स्थल में हुए बदलाव को सीएम मोहन यादव के सादगी और बचत के मॉडल के तौर पर देख रहे हैं। साल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पचमढ़ी में चिंतन शिविर किया था, जहां भारी सरकारी खर्च हुआ था। इस परंपरा को तोड़ते हुए डॉ. यादव ने भोपाल को चुनकर यह संदेश दिया है कि उनकी सरकार फिजूलखर्ची से बचकर प्रशासनिक काम को प्राथमिकता देती है।
पंचायत, निकाय और मंडी चुनावों की जमीनी बिसात
इस चिंतन शिविर का सीधा राजनीतिक असर 2027 के नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर पड़ना तय है। इसके साथ ही छात्र संघ, सहकारिता संस्थाओं, कृषि मंडियों और जल उपभोक्ता संस्थाओं के आगामी चुनावों को साधने के लिए सरकारी योजनाओं के तेज क्रियान्वयन की रणनीति पर विस्तार से विमर्श किया जाएगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में वोटर्स के बीच पकड़ मजबूत रहे।
सरकार के भविष्य का तय होगा रोडमैप
सितंबर में भोपाल की धरती पर जुटने वाले मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सरकार के बीते ढाई साल के कामकाज की गहन समीक्षा कर आने वाले ढाई साल के लिए एक ऐसा राजनीतिक व प्रशासनिक रोडमैप बनाएंगे जो 2027 और 2028 की चुनावी राह को आसान कर सके।

