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उज्जैन के चरक भवन अस्पताल में ब्लैकआउट: एक घंटे अंधेरे में इलाज, मरीजों में हड़कंप


नई दिल्ली ।  मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित संभागीय चरक भवन अस्पताल में सोमवार शाम उस समय अव्यवस्था फैल गई जब अचानक करीब एक घंटे तक बिजली सप्लाई ठप हो गई। शाम लगभग 6:45 बजे हुई इस घटना के बाद पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली गुल होने की स्थिति करीब 7:45 बजे तक बनी रही, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं।

जनरेटर बैकअप फेल, टॉर्च की रोशनी में इलाज
अस्पताल में बिजली जाने के बावजूद जनरेटर बैकअप समय पर चालू नहीं हो सका। इसके चलते कई वार्डों में डॉक्टरों और स्टाफ को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ही इलाज करना पड़ा। वार्डों, गलियारों और इमरजेंसी यूनिट में अंधेरा होने के कारण मरीजों की स्थिति और भी कठिन हो गई। गर्मी और उमस के बीच मरीज बेहाल नजर आए।

इमरजेंसी वार्ड में सबसे ज्यादा अस
सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिली, जहां बिजली लंबे समय तक बहाल नहीं हो पाई। गंभीर मरीजों को भी अंधेरे में इलाज मिलने से परिजन काफी परेशान दिखाई दिए। परिजनों ने बताया कि इस दौरान अस्पताल में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था, जिससे व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित रही।

परिजनों ने उठाए सवाल, व्यवस्था पर नाराजग
मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में भी बुनियादी बिजली व्यवस्था का ठप होना बेहद चिंताजनक है। लोगों ने यह भी कहा कि जनरेटर जैसी बैकअप सुविधा होते हुए भी उसका समय पर शुरू न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल
चरक भवन अस्पताल में इससे पहले भी ऑक्सीजन प्लांट और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बार-बार सुधार के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है। इस ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

चरक भवन अस्पताल में हुआ यह ब्लैकआउट न केवल तकनीकी खामी को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।

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