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वैश्विक अस्थिरता और सप्लाई चेन संकट का असर, भारत में प्रीमियम हाउसिंग की कीमतों में 28% तक उछाल; महानगरों में मजबूत बनी मांग


नई दिल्ली ।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का प्रीमियम आवास बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश के प्रमुख शहरों में प्रीमियम आवासों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ताजा बाजार विश्लेषण के अनुसार कई प्रमुख शहरों में प्रीमियम संपत्तियों के मूल्य में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब बेहतर गुणवत्ता, विश्वसनीय डेवलपर और रणनीतिक लोकेशन वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार मुंबई, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में प्रीमियम आवासों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। निर्माणाधीन प्रीमियम परियोजनाओं की कीमतों में मुंबई में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नोएडा में यह बढ़ोतरी 4 से 28 प्रतिशत के बीच रही। गुरुग्राम में करीब 2 प्रतिशत और बेंगलुरु में 3 से 11 प्रतिशत तक की वार्षिक वृद्धि देखी गई। यह संकेत देता है कि विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों और बेहतर कनेक्टिविटी वाले कॉरिडोर में निवेशकों तथा खरीदारों का भरोसा कायम है।

तैयार प्रीमियम आवासों के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। दिल्ली में लग्जरी फ्लोर और तैयार प्रीमियम घरों की औसत कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। बेंगलुरु में यह वृद्धि 8 से 10 प्रतिशत और मुंबई में 2 से 7 प्रतिशत के बीच रही। विशेषज्ञों का मानना है कि तैयार संपत्तियों की बढ़ती मांग उन खरीदारों से आ रही है जो तुरंत रहने योग्य, आधुनिक सुविधाओं से युक्त और उच्च गुणवत्ता वाले घरों की तलाश में हैं।

रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बाजार अब केवल तेज कीमत वृद्धि पर आधारित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक मूल्य सृजन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रीमियम परियोजनाओं में बेहतर निर्माण गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, ऊर्जा दक्षता, हरित सुविधाएं और वेलनेस आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पहलुओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। यही कारण है कि उच्च आय वर्ग के खरीदार अब केवल संपत्ति खरीदने के बजाय दीर्घकालिक निवेश और बेहतर जीवनशैली को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का असर निर्माण सामग्री की लागत पर भी पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और लॉजिस्टिक लागत बढ़ने से परियोजनाओं की कुल लागत प्रभावित हुई है, जिसका असर प्रीमियम आवासों की कीमतों में भी दिखाई दिया। इसके बावजूद मांग में कमी नहीं आई है, क्योंकि बेहतर आय, मजबूत निवेश क्षमता और गुणवत्तापूर्ण आवासों की बढ़ती आवश्यकता इस वर्ग के बाजार को समर्थन दे रही है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खरीदार अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो चुके हैं। वे परियोजना की लोकेशन, डेवलपर की विश्वसनीयता, निर्माण गुणवत्ता, भविष्य की संभावनाओं और उपलब्ध सुविधाओं का गहन मूल्यांकन करने के बाद ही निवेश का निर्णय ले रहे हैं। इस बदलते रुझान ने डेवलपर्स को भी गुणवत्ता और पारदर्शिता पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है।

रियल एस्टेट बाजार के मौजूदा संकेत बताते हैं कि भारत के प्रीमियम आवास क्षेत्र में आने वाले समय में भी स्थिर मांग बनी रह सकती है। बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे, नई कनेक्टिविटी परियोजनाओं, बढ़ती आय और गुणवत्तापूर्ण आवासों की प्राथमिकता के कारण यह वर्ग निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो प्रीमियम हाउसिंग बाजार आने वाले वर्षों में भी संतुलित और मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकता है।

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