भोपाल में गरमाया शिक्षक भर्ती का सियासी मुद्दा: 25 हजार पदों की मांग को लेकर आमरण अनशन
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2023 की दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। भोपाल के नीलम पार्क में अभ्यर्थियों के धरने और नरेंद्र राजपूत के आमरण अनशन से प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ गया है।
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2023 का मामला अब सीधे तौर पर सरकार की रोजगार नीतियों और वादों को कटघरे में खड़ा कर रहा है। उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती के वेटिंग अभ्यर्थियों का सब्र टूटने के बाद उन्होंने राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों का ध्यान खींचने के लिए बड़ा धरना शुरू कर दिया है। भर्ती में दूसरी काउंसलिंग और रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग तेज हो गई है, वहीं ब्यावरा के नरेंद्र राजपूत 21 अगस्त की रात से आमरण अनशन पर बैठकर सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।
24 से 26 अगस्त का अल्टीमेटम: तीन दिन का सघन प्रदर्शन
वेटिंग शिक्षक संघ, वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले अभ्यर्थियों ने 24 से 26 अगस्त तक तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन की रणनीति तैयार की है। प्रदर्शनकारी अंबेडकर पार्क, टीटी नगर और नीलम पार्क में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। युवाओं का कहना है कि सरकार यदि युवाओं के हित में फैसले लेने का दावा करती है, तो उसे अटकी पड़ी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में तत्काल आगे की कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।
3 साल की देरी पर उठे प्रशासनिक सवाल
अभ्यर्थियों ने शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया को शुरू हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं। परीक्षा पास करने और चयन के सभी मापदंड पूरे करने के बावजूद दूसरी काउंसलिंग की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने कहा कि जब प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, तो फिर योग्य युवाओं को नियुक्ति पत्र देने में देरी क्यों की जा रही है।
प्राथमिक और माध्यमिक वर्ग में बड़े पैमाने पर पदवृद्धि की मांग
इस आंदोलन के जरिए उम्मीदवार प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने का सीधा दबाव बना रहे हैं। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 में कम से कम 3 हजार पद जोड़ने की मांग भी मजबूती से उठाई जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इन पदों को शामिल करने से प्रदेश में बेरोजगारी का संकट कम होगा और योग्य युवाओं को शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने का अवसर मिलेगा।
42 घंटे से बिना अन्न-जल के अनशन पर डटे नरेंद्र राजपूत
शासन पर नीतिगत दबाव बनाने के लिए ब्यावरा के नरेंद्र राजपूत का आमरण अनशन अब 42 घंटे का समय पूरा कर चुका है। नरेंद्र ने 21 अगस्त की रात 12 बजे से अन्न और जल दोनों का त्याग कर रखा है। उन्होंने दो टूक कहा कि उनका यह संघर्ष उस पूरी युवा पीढ़ी के लिए है जो वर्षों से सरकारी स्कूलों में स्थायी शिक्षक बनने का सपना संजोए किताबों में सिर खपा रही है।
केवल आश्वासनों से बात नहीं बनेगी, ठोस फैसले की दरकार
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पूर्व में कई मंत्रियों और अधिकारियों को लगातार ज्ञापन दिए गए और विभिन्न मंचों पर प्रदर्शन हुए, लेकिन नतीजा सिर्फ खोखले आश्वासनों तक सीमित रहा। दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि को लेकर सरकार के ढुलमुल रवैये ने युवाओं को हताश किया है, जिसके चलते उन्हें मजबूरन राजधानी की सड़कों पर आकर आंदोलन का मोर्चा संभालना पड़ा है।
लोकतांत्रिक तरीके से अधिकार मांगने का संदेश
अनशनकारी नरेंद्र राजपूत और अन्य शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि वे किसी भी तरह की अराजकता या उग्र प्रदर्शन के पक्षधर नहीं हैं। वे पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक रास्ते पर चलकर अपनी आवाज नीति-निर्माताओं तक पहुंचा रहे हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि वर्षों की मेहनत के बाद चयनित हुए युवाओं को खाली पदों पर नियुक्ति का अवसर देकर सरकार को अपनी संवेदनशीलता साबित करनी चाहिए।
