एमपी में ट्राइबल वोटबैंक साधने की तैयारी: सीएम मोहन यादव ने अचानक बुलाई आदिवासी नेताओं की बैठक
मध्य प्रदेश में भाजपा की ट्राइबल रणनीति को धार देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आदिवासी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की अचानक बैठक बुलाई है। चार घंटे के मंथन के बाद सभी नेता मुख्यमंत्री निवास पर डिनर करेंगे।
मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोटबैंक और उनके नेतृत्व को साधे रखने की कवायद के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चला है। मुख्यमंत्री सोमवार को भोपाल स्थित सीएम हाउस में भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले चुनिंदा सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के साथ रात्रिभोज करेंगे। डिनर टेबल पर बैठने से पहले मुख्यमंत्री इन नेताओं के साथ चार घंटे लंबी गंभीर राजनीतिक मंत्रणा करेंगे। अचानक बनाए गए इस डिनर डिप्लोमेसी के कार्यक्रम ने राज्य के सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है।
4 घंटे की मैराथन बैठक में सियासी समीकरणों पर मंथन
सोमवार शाम 4 बजे से मुख्यमंत्री निवास में यह महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक शुरू होगी, जो रात 8 बजे तक अनवरत चलेगी। इसके बाद मुख्यमंत्री सभी आमंत्रित नेताओं के साथ भोजन करेंगे। हालांकि पार्टी या सरकार की तरफ से बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें आगामी राजनीतिक चुनौतियों और आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन पर गोपनीय चर्चा होगी।
कैबिनेट के आदिवासी चेहरों को एकजुट करने की पहल
इस डिनर बैठक में राज्य मंत्रिमंडल के उन सभी प्रमुख मंत्रियों को विशेष तौर पर बुलाया गया है जो ट्राइबल वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें वन मंत्री नागर सिंह चौहान, पीएचई मंत्री संपतिया उइके, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए मंत्री कमलेश शाह के नाम शामिल हैं। इन मंत्रियों की मौजूदगी से साफ है कि सरकार संगठन और सत्ता के बीच तालमेल को परखना चाहती है।
सावित्री ठाकुर, फग्गन सिंह कुलस्ते समेत दिग्गज नेता आमंत्रित
इस महामंथन में सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि केंद्र के बड़े आदिवासी नेताओं को भी शामिल किया गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, सांसद हिमाद्री सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के भी इस बैठक में शामिल होने की मजबूत सूचना है। इसके अतिरिक्त करीब 13 अन्य प्रमुख ट्राइबल नेताओं को भी भोपाल तलब किया गया है।
अचानक बने शेड्यूल से पार्टी के भीतर और बाहर सुगबुगाहट
जिस तेजी और अचानक रूप से इस बैठक का समय निर्धारित किया गया, उसने विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कई नेताओं को भी चौंका दिया है। केवल एक विशेष वर्ग यानी ट्राइबल नेताओं को ही इस बैठक में तरजीह दिए जाने के चलते राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता संतुलन और क्षेत्रीय असंतोष को दूर करने की एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।
केंद्रीय भाजपा नेतृत्व की ट्राइबल आउटरीच नीति का असर
जानकारों के मुताबिक, यह पूरी कवायद भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के उस निर्देश का हिस्सा है जिसमें सभी राज्य इकाइयों को आदिवासी समुदाय के साथ सीधा संवाद स्थापित करने को कहा गया है। मध्य प्रदेश में जनजातीय आबादी एक बड़ा निर्णायक कारक है, ऐसे में सीएम मोहन यादव खुद आगे बढ़कर इन नेताओं से जमीनी फीडबैक लेकर अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहते हैं।
