‘अखबार पढ़कर याचिका न लगाएं’, HC ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार, जानें क्या है पूरा मामला ?
बालाघाट में 30 बच्चों की मौत के दावे को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
Balaghat Children Death: मध्य प्रदेश के बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र में 30 बच्चों की मौत के दावे पर दायर जनहित याचिका (PIL) पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा-केवल अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर जनहित याचिका दायर करना पर्याप्त नहीं है।
‘अखबार पढ़कर याचिका न लगाएं’
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा-केवल अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर जनहित याचिका दायर करना पर्याप्त नहीं है।
कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता को बालाघाट जाकर बैहर और बिरसा क्षेत्र की ग्राउंड रियलिटी देखना चाहिए। साथ ही उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि करने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही PIL पर आगे सुनवाई होगी।
1 सितंबर को दायर हुई थी याचिका
नरसिंहपुर के करेली निवासी अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने 1 सितंबर को जनहित याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया गया है कि बैहर और बिरसा क्षेत्र में मलेरिया, खसरा और कुपोषण सहित बीमारियों से हाल में 30 बच्चों की मौत हुई है। याचिका में बच्चों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। याचिका में स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
करीब ढाई महीने में 30 बच्चों की मौत का दावा
याचिका और स्थानीय दावों के मुताबिक, बैहर और बिरसा के आदिवासी अंचलों में पिछले करीब ढाई महीने में खसरा, मलेरिया, चर्मरोग, डायरिया और अन्य बीमारियों से 30 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है।
आदिवासी समाज ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश धुर्वे ने कहा- प्रभावित क्षेत्रों में इन बीमारियों पर अब तक पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। बीमार बच्चे रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन की सेवाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक मदद देने की मांग
दिनेश धुर्वे ने बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण और वैक्सीनेशन की कमी को वजह बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और स्वास्थ्य मंत्री की भी जवाबदारी है। आदिवासियों के कल्याण के लिए आने वाली राशि आखिर कहां जा रही है। साथ ही मृत बच्चों के परिवारों को तत्काल आर्थिक मदद देने की मांग की।
नौ सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बैहर और बिरसा क्षेत्र में जाकर स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने तथा बच्चों की मौत, बीमारी, कुपोषण, अस्पतालों की क्षमता और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने के निर्देश दिए हैं। अब नौ सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पेश की जाने वाली वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देशों पर विचार करेगा।

