MP News: जबलपुर में T-72 टैंकों का होगा ओवरहॉल, सालाना 12 टैंक होंगे अपग्रेड; रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया भूमिपूजन
MP News: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जबलपुर में 472 करोड़ रुपये की लागत से T-72 और T-90 टैंकों की ओवरहॉलिंग सुविधा का भूमिपूजन किया।
MP News: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-72 टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। करीब 472 करोड़ रुपए की लागत से यहां इंडियन आर्मी के T-72 टैंकों की मरम्मत, जांच और तकनीकी अपग्रेड के लिए सुविधा तैयार की जाएगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रक्षा के क्षेत्र में जबलपुर की अलग पहचान
सीएम मोहन यादव ने कहा कि रक्षा के मामले में जबलपुर की अलग पहचान है। इसके नाम में ही बल लगा हुआ है। जबलपुर हमारा शहर है, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमारी सेना पराक्रम की धनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समय बदल रहा है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती, अमर शहीद राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, स्वतंत्रता सेनानियों की वजह से जबलपुर की विरासत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं रानी दुर्गावती का युद्ध और इस युद्ध में वे लगातार जीत रही थीं, लेकिन तकनीक की वजह से उनकी विजय का क्रम टूट गया।
राजनाथ सिंह बोले- ड्रोन के दौर में भी टैंक जरूरी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- आज युद्ध का तरीका बदल रहा है। ड्रोन और मिसाइल का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैंकों की जरूरत खत्म हो गई है। टैंकों को नई तकनीक, बेहतर सेंसर और नई क्षमताओं से लैस करना जरूरी है।
उन्होंने बताया- बदलते युद्ध के तरीके के हिसाब से काम कर सकें। मध्य प्रदेश रक्षा उत्पादन और निवेश में महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपए था। अब यह बढ़कर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
रक्षा निर्यात करीब 1,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपए हो गया है। सरकार ने 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा है।
टैलेंट और तकनीकी युवाओं को मिलेगा अवसर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि टैंक हमारे देश की ताकत हैं. उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी मजबूत क्यों न हो, जमीनी लड़ाई में टैंक की अपनी अहम भूमिका है. जबलपुर में टैंकों की ओवरहालिंग क्षमता बढ़ने से व्हीकल फैक्ट्री में काम का दायरा बढ़ेगा और आने वाले समय में जबलपुर रक्षा क्षेत्र के बड़े हब के रूप में विकसित होगा.
472 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में स्थानीय टैलेंट और तकनीकी वर्कफोर्स को अवसर मिलेगा. युवाओं में स्किल की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें अवसर, तकनीक और सही इकोसिस्टम देने की है.
जबलपुर की 4 रक्षा फैक्ट्रियों ने बनाया रिकॉर्ड
जबलपुर लंबे समय से रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र रहा है। यहां व्हीकल फैक्ट्री समेत कई रक्षा निर्माणियां सेना के लिए अलग-अलग उपकरण तैयार करती हैं। 2025-26 में जबलपुर की चार प्रमुख रक्षा निर्माणियों ने मिलकर 4,622 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड उत्पादन किया।
इनमें व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का उत्पादन करीब 1,056 करोड़ रुपए रहा। T-72 ओवरहॉल परियोजना से जबलपुर की रक्षा क्षेत्र में भूमिका और बढ़ेगी। टैंकों की मरम्मत और अपग्रेड से स्थानीय उद्योगों और तकनीकी काम से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर बनने की उम्मीद है।
अभी T-72 का ओवरहॉल कहां होता है?
फिलहाल T-72 टैंकों के ओवरहॉल की मुख्य जिम्मेदारी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) की हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF), आवड़ी की है। नई सुविधा बनने के बाद जबलपुर में टैंकों के ओवरहॉल की क्षमता बढ़ेगी।
इससे सेना के जिन T-72 टैंकों को बड़ी मरम्मत या तकनीकी सुधार की जरूरत होगी, उन्हें जल्द दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सकेगा।
दो T-72 का पहले ही कर चुका है ओवरहॉल
472 करोड़ की परियोजना शुरू होने से पहले ही व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने इसका ट्रायल किया था। फैक्ट्री ने दो T-72 टैंकों का ओवरहॉल पूरा करके भारतीय सेना को सौंपा। इस दौरान टैंकों की तकनीकी जांच की गई।
जरूरत के मुताबिक मरम्मत और खराब या पुराने पुर्जों को बदलने का काम किया गया। सेना के तय तकनीकी और गुणवत्ता मानकों के अनुसार इनकी जांच की गई थी। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद जबलपुर में इस काम के लिए स्थायी सुविधा विकसित की जा रही है।
ओवरहॉल का मतलब क्या है?
ओवरहॉल सिर्फ टैंक की सामान्य सर्विसिंग नहीं है। लंबे समय तक चलने के बाद टैंक के जरूरी हिस्सों की गहराई से जांच और बड़ी मरम्मत की जाती है। इसमें इंजन, ट्रांसमिशन, हथियार सिस्टम, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और दूसरे जरूरी हिस्सों की जांच होती है।
खराब पुर्जों को बदला या ठीक किया जाता है। इसके बाद टैंक को तैयार करके अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं। टेस्ट में सही पाए जाने के बाद टैंक को सेना के इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है।
T-72 'अजेय' की क्या खासियत है?
T-72 भारतीय सेना के प्रमुख मेन बैटल टैंकों में शामिल है। इसे मूल रूप से सोवियत संघ में विकसित किया गया था और भारत में भी इसका निर्माण हुआ है। समय के साथ इन टैंकों में अलग-अलग तकनीकी सुधार और अपग्रेड किए गए हैं।
T-72 में 125 मिमी स्मूथबोर गन और ऑटो-लोडर सिस्टम है। इसमें तीन सदस्यीय क्रू होता है। टैंक पारंपरिक गोला-बारूद के साथ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल भी दाग सकता है।
जबलपुर में प्रस्तावित नई सुविधा के जरिए अब T-72 के ओवरहॉल और तकनीकी उन्नयन की क्षमता को स्थायी रूप से बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में हर साल 12 टैंकों के ओवरहॉल का लक्ष्य रखा गया है।
