MP शिक्षक भर्ती पर सियासी घमासान: सरकार का पद बढ़ाने से इनकार, समर्थन में उतरे उमंग सिंघार
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है। सरकार द्वारा पदों की वृद्धि से इनकार करने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अभ्यर्थियों के पक्ष में मोर्चा खोल दिया है, जिससे सत्ता पक्ष पर दबाव बढ़ गया है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में सेवारत और बेरोजगार शिक्षकों का मुद्दा एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सीधा टकराव का कारण बन गया है। राजधानी भोपाल में शिक्षक पदों की संख्या में इजाफा करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को सरकार ने दो टूक मना कर दिया है। शिक्षा विभाग ने नीतिगत रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि परीक्षा का परिणाम घोषित हो जाने के बाद मूल विज्ञापन के पदों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। विभाग के अनुसार जो पद रिक्त रह गए हैं, उन्हें भविष्य की नई भर्तियों में ही शामिल किया जा सकता है, पुरानी भर्ती में पदों को जोड़ना विधिसम्मत नहीं है।
आरक्षण नियमों और बैकलॉग पदों पर सरकार का सख्त रुख
विभाग ने आरक्षण और बैकलॉग को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए राजनीतिक आरोपों पर विराम लगाने की कोशिश की है। अधिकारियों ने बताया कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण कई पद बैकलॉग श्रेणी में हैं। इन पदों को कानूनी तौर पर अनारक्षित या ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। सरकार ने अभ्यर्थियों के उस प्रचार को भ्रामक बताया जिसमें कहा जा रहा था कि रिक्त पदों पर भर्ती रोकी गई है। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि धरने में बैठे लोग चयनित अभ्यर्थी नहीं हैं।
शिक्षा मंत्री का बयान: एक साथ सभी पद भरना मुमकिन नहीं
राजनीतिक दबाव के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सरकार का बचाव करते हुए पहले ही कहा था कि प्रदेश के सभी खाली पदों पर एकमुश्त भर्ती करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षक काम कर रहे हैं, लेकिन उन सभी पदों को पूरी तरह खाली मान लेना सही आकलन नहीं होगा। भर्ती प्रक्रिया में बैकलॉग और ओबीसी आरक्षण के जटिल समीकरणों का पालन अनिवार्य है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया था कि मुख्यमंत्री की मंशा अधिक से अधिक खाली पदों को भरने की है।
उमंग सिंघार ने खोला मोर्चा, अनशनकारियों की स्थिति पर सवाल
इस बीच भोपाल के धरना स्थल पर तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां कई दिनों से आंदोलन चल रहा है और तीन अभ्यर्थी आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बेरोजगारी से तंग आकर उनके परिजनों ने ही उन्हें हक की लड़ाई लड़ने के लिए भेजा है। अनशन पर बैठे युवाओं की शारीरिक हालत बिगड़ने के साथ ही कांग्रेस आक्रामक हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीधे सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आंदोलनकारियों की मांगें 100 फीसदी जायज हैं और सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत समाधान निकालना चाहिए।

