नेपाल में तिब्बत से आई बाढ़ ने बढ़ाई प्रशासनिक चिंता, 384 लापता और बिहार में भी गंडक उफान पर
नेपाल के रसुवा में चीन के तिब्बत से आई विनाशकारी बाढ़ ने कूटनीतिक और प्रशासनिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस घटना में 7 मौतें हुईं और 384 लोग लापता हैं, जिसका सीधा असर भारत के बिहार राज्य पर भी पड़ रहा है।
चीन के तिब्बत क्षेत्र से अचानक आई बाढ़ ने न सिर्फ नेपाल बल्कि भारत के सीमावर्ती इलाकों के प्रशासन की भी नींद उड़ा दी है। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। इस विनाशकारी बाढ़ का पानी कई घरों और दुकानों में घुस गया, और अपने साथ वाहन, सामान और यहां तक कि एक पूरा पुल भी बहा ले गया। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, नदी पर अचानक आई इस बाढ़ के बाद 384 यात्रियों के लापता होने की पहचान की गई है, जिनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। इस अंतरराष्ट्रीय जल आपदा के कारण बिहार के 8 जिलों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
बुनियादी ढांचे को नुकसान और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा जिले के टिमुरे और स्याब्रुबेसी में बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। अचानक बढ़े पानी के कारण बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के साथ-साथ हुए भूस्खलन ने स्थिति को और भी विकराल बना दिया है। इस आपदा का सीधा असर एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर भी पड़ा है जो बाढ़ की चपेट में आ गया है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अब प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य को युद्धस्तर पर तेज किया गया है।
384 लोगों की गुमशुदगी और 7 की मौत ने बढ़ाई चिंता
इस भयानक आपदा में जनहानि के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, सीमा सुरक्षा में लगे टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी भी लापता हैं। हालांकि, राहत टीमों ने 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने बुधवार सुबह रासुवा की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद 384 यात्रियों के लापता होने की पहचान की है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर 14 हेलिकॉप्टरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
हेलिपैड बह जाने से रेस्क्यू ऑपरेशन में आई बाधा
राहत कार्यों के दौरान प्रशासनिक मशीनरी को कई जमीनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजे गए एक रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को सुरक्षित लैंडिंग की जगह नहीं मिल सकी और उसे वापस काठमांडू लौटना पड़ा। इसका मुख्य कारण यह था कि बाढ़ के तेज पानी में स्थानीय हेलिपैड ही बह गया था, जिससे पायलट अपना हेलिकॉप्टर नहीं उतार सके।
बिहार के 8 जिलों में गंडक नदी पर हाई अलर्ट घोषित
नेपाल की इस बाढ़ का सीधा असर भारत के बिहार राज्य पर भी पड़ रहा है, जिसने राज्य सरकार को अलर्ट मोड पर ला दिया है। बिहार प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी दी है कि गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आ सकती है। इसके मद्देनजर सभी संबंधित जिलों में प्रशासन को निगरानी बढ़ाने और किसी भी संभावित खतरे से तुरंत निपटने के निर्देश दिए गए हैं।
तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) की आशंका का विश्लेषण
इस अचानक आई बाढ़ के कारणों का तकनीकी विश्लेषण चौंकाने वाला है। अधिकारियों के मुताबिक, रसुवा में पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश दर्ज नहीं हुई थी। ऐसे में यह माना जा रहा है कि इस बाढ़ के पीछे तिब्बत में किसी ग्लेशियल झील का फटना (GLOF) मुख्य कारण हो सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पानी किस ग्लेशियल झील से निकला है। तकनीकी टीमें और विशेषज्ञ सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए बाढ़ के असली स्रोत का पता लगाने में जुटे हुए हैं।
भोटेकोशी बेसिन की 122 ग्लेशियल झीलें और GLOF का खतरा
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें तो ग्लेशियल झील के सामने अक्सर बर्फ, मिट्टी-पत्थर और मलबे की प्राकृतिक बांध जैसी संरचना होती है। जब यह कमजोर पड़कर टूट जाती है, तो झील का पानी अचानक नीचे बहने लगता है, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहते हैं। ICIMOD और UNDP की 2020 की एक स्टडी के अनुसार, भोटेकोशी बेसिन में ऐसी 122 ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। अब इसी बात की वैज्ञानिक जांच की जा रही है कि क्या इनमें से किसी झील के अचानक टूटने या पानी का दबाव बढ़ने से यह फ्लैश फ्लड आया है।

