2029 के चुनावी फॉर्मूले पर मोदी कैबिनेट का पुनर्गठन, कई मंत्रियों पर गिरेगी गाज और नए चेहरों की होगी एंट्री
चुनावी रणनीतियों को धार देने के लिए मोदी मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की तैयारी है। संगठन में गए मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि चुनावी राज्यों के नए चेहरों को सरकार में मौका मिलेगा।
आगामी चुनावी चक्र को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सत्ता और संगठन की बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। भाजपा में हाल ही में हुए बड़े संगठनात्मक बदलावों के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। माना जा रहा है कि 2027 के कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी टीम में बड़ा बदलाव कर सकते हैं। संगठन में कमान संभाल चुके कुछ नेताओं को 'एक व्यक्ति-एक पद' के सिद्धांत के तहत कैबिनेट से मुक्त किया जा सकता है, जबकि चुनावी राज्यों के समीकरण साधने के लिए नए चेहरों को मौका मिलेगा।
चुनावी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर जोर, 6-7 नए चेहरों को मौका
संख्या के लिहाज से फिलहाल मोदी सरकार में 69 मंत्री हैं, जबकि संविधान के मुताबिक अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस तरह 12 पद खाली हैं, लेकिन राजनीतिक संतुलन साधने के लिए लगभग 6 से 7 नए चेहरों को ही सरकार में शामिल करने की योजना है। इसमें हिमाचल और उत्तर भारत के प्रमुख युवा चेहरे अनुराग ठाकुर का नाम मजबूती से उभर रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक जैसे बड़े जनाधार वाले राज्यों को कैबिनेट में नया और संतुलित प्रतिनिधित्व देने पर पूरा जोर रहेगा।
पीयूष गोयल के कोषाध्यक्ष बनने के बाद सियासी समीकरणों में बदलाव
कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ चेहरों में शुमार पीयूष गोयल को लेकर भी सियासी हलचल तेज है। पार्टी ने उन्हें हाल ही में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष जैसी भारी-भरकम जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा के 'एक व्यक्ति-एक पद' के संगठनात्मक सिद्धांत के आधार पर उनके कैबिनेट में बने रहने को लेकर राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उनके रणनीतिक कद को देखते हुए सरकार से उन्हें हटाने को लेकर अभी तक कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
दिल्ली और यूपी अध्यक्षों की दोहरी भूमिका पर मंथन
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बने हर्ष मल्होत्रा केंद्र में सड़क परिवहन और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं। इसी तरह पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं और वित्त राज्य मंत्री भी हैं। संगठन और सरकार की इस दोहरी जिम्मेदारी के चलते दोनों नेताओं के भविष्य पर मंथन चल रहा है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों और वहां के जातीय संतुलन को देखते हुए पंकज चौधरी को मंत्री पद पर बरकरार रखे जाने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय में बदलाव की सुगबुगाहट, हरदीप पुरी का कार्यकाल
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की कैबिनेट से विदाई की राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हैं। उनका राज्यसभा का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है और उन्हें दोबारा उच्च सदन में भेजने को लेकर पार्टी में संशय बना हुआ है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि पेट्रोलियम जैसे अहम मंत्रालय की कमान किसी अन्य वरिष्ठ नेता को दी जा सकती है। हाल के दिनों में पेट्रोल की कीमतों और एथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े विवादों के कारण भी उनके विभाग पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
नितिन गडकरी का मजबूत संघ बैकग्राउंड और मंत्रालय का सवाल
वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के विभाग को लेकर भी कुछ अटकलें लगाई जा रही हैं। एथेनॉल नीति पर सोशल मीडिया में उठे विरोध के बाद सवाल उठे कि क्या उनका विभाग बदला जा सकता है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि गडकरी को सरकार से हटाना या उनका मंत्रालय बदलना एक कठिन राजनीतिक फैसला होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके गहरे संबंध और देश के बुनियादी ढांचे के निर्माण में उनकी अनिवार्य भूमिका उनके पक्ष में सबसे बड़ा ढाल है।
महाराष्ट्र में शिवसेना को साधने के लिए श्रीकांत शिंदे का दांव
महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम संभावित मंत्रियों की सूची में प्रमुखता से शामिल है। पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को केंद्र में राज्यमंत्री बनाकर भाजपा महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन को अटूट बनाए रखने का सीधा संदेश देना चाहती है, जिससे आने वाले चुनावों में दोनों दलों का जमीनी तालमेल और ज्यादा पुख्ता हो सके।
