पड़ोसी धर्म: नेपाल संकट में भारत का बड़ा कदम, मोदी ने बालेन शाह को दिया मदद का भरोसा
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने 'नेबरहुड फर्स्ट' की कूटनीति के तहत फौरन मदद का हाथ बढ़ाया है। पीएम मोदी ने बालेन शाह से बात कर 30 टन राहत सामग्री भेजने का बड़ा फैसला लिया है।
नेपाल में चीन सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने न सिर्फ भयानक तबाही मचाई है, बल्कि यह एक बड़ा भू-राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग लापता हैं और कई लोगों की मौत हो चुकी है। इस गंभीर संकट के समय में भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) कूटनीति का शानदार उदाहरण पेश किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की और इस जनहानि पर गहरा दुख जताया। उन्होंने नेपाल को हर मुमकिन मानवीय और कूटनीतिक मदद देने का पक्का भरोसा दिया है।
कूटनीतिक मोर्चे पर मोदी और बालेन शाह की अहम बात
पीएम मोदी ने इस आपदा में तुरंत प्रतिक्रिया देकर एक बड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि उनकी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर सीधी बातचीत हुई है। मोदी जी ने नेपाल में हुए नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के साथ डटकर खड़े हैं। उन्होंने नेपाल सरकार को राहत और बचाव कार्यों में बिना किसी शर्त के हर संभव सहयोग देने का वादा किया है।
30 टन राहत सामग्री से भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत सरकार ने नेपाल संकट पर अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए 30 टन राहत सामग्री भेजने का बड़ा फैसला लिया है। जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के दो बड़े विमानों को डिप्लॉय किया गया है। पहला विमान बुधवार को ही जरूरी राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए उड़ान भरेगा। वहीं, दूसरा विमान गुरुवार को काठमांडू पहुंचने की तैयारी में है। भारत का यह त्वरित एक्शन उसकी क्षेत्रीय नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाता है।
400 लापता और तीन जिलों में भारी तबाही
नेपाल-चीन सीमा से लगे रसुवा जिले में यह बाढ़ अचानक आई और सब कुछ लील गई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी मिली है, जबकि 16 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस बाढ़ से रसुवा, धादिंग और नुवाकोट जैसे अहम जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में सड़क संपर्क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे रेस्क्यू के काम में अड़चन आ रही है।
भारत के लिए चिंता: 105 भारतीय और 37 NRI लापता
इस त्रासदी का सीधा असर भारत पर भी पड़ा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, रसुवा में बाढ़ के बाद 384 यात्री लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि लापता विदेशियों में 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई (NRI) शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के नागरिक भी प्रभावित हुए हैं, जिससे यह एक अंतरराष्ट्रीय संकट बन गया है।
नेपाल की अंतरराष्ट्रीय गुहार और भारत की तत्परता
बाढ़ के बाद हालात बेकाबू होते देख नेपाल सरकार ने भारत और चीन समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार लगाई थी। इस अपील पर भारत ने सबसे पहले और सबसे तेज प्रतिक्रिया दी है। भारत ने वायुसेना के विमानों के जरिए जरूरी सामान सीधे प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। यह कदम चीन सीमा के पास भारत की त्वरित पहुंच और कूटनीतिक मजबूती को भी साबित करता है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और भारत की मदद से उम्मीद
फिलहाल, बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम बहुत ही चुनौतीपूर्ण स्थिति में जारी है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की वजह से नेपाल प्रशासन के सामने उन्हें सुरक्षित निकालने का भारी दबाव है। ऐसे में भारत की ओर से भेजी जा रही 30 टन की यह त्वरित राहत सामग्री न सिर्फ प्रभावित लोगों की जान बचाएगी, बल्कि दोनों देशों के बीच संबंधों को भी एक नई मजबूती देगी।
