जयपुर स्कूल विवाद पर गरमाई राजनीति, CJP ने भाजपा समर्थकों पर लगाया मारपीट का आरोप
जयपुर के बगरू इलाके में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर सीजेपी और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद अब सियासी रूप ले चुका है। सीजेपी ने भाजपा समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया, जबकि ग्रामीणों ने 12 लाख के विधायक फंड का हवाला दिया।
जयपुर के बगरू क्षेत्र में स्थित रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल की स्थिति को लेकर अब सियासत पूरी तरह गरमा गई है। सीजेपी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच हुआ टकराव अब सीधे तौर पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है। सीजेपी की टीम जब स्कूल का जायजा लेने पहुंची तो ग्रामीणों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस घटना के बाद सीजेपी ने गाड़ियों में तोड़फोड़ और हमले का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने इन राजनीतिक आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
टीम के पहुंचते ही गरमाया माहौल, धरने पर बैठे लोग
घटनाक्रम के अनुसार, बगरू के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल में सीजेपी की टीम व्यवस्थाओं और बुनियादी कमियों का जायजा लेने के इरादे से गई थी। पार्टी का दावा था कि वे जनता से जुड़े इस मुद्दे को सामने लाना चाहते हैं। लेकिन जैसे ही कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, ग्रामीणों ने उनकी राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाते हुए विरोध शुरू कर दिया और उन्हें गांव छोड़कर जाने का फरमान सुना दिया। देखते ही देखते ग्रामीण लामबंद होकर स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए।
आशुतोष रांका का दावा: भाजपा समर्थकों ने कराया हमला
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इस घटना को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि उनकी टीम पर जानबूझकर हमला कराया गया और गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल की बदहाली और बच्चों की पढ़ाई की दुर्दशा पर सीजेपी लगातार सवाल खड़े कर रही है, जिससे घबराकर भाजपा समर्थकों ने इस विरोध को अंजाम दिया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राजनीतिक दबाव में आए बिना हमलावरों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए।
विधायक के 12 लाख रुपये के फंड का ग्रामीणों ने दिया हवाला
इधर, ग्रामीणों की तरफ से बात रखते हुए जुगल किशोर शर्मा ने सीजेपी के सभी दावों को झूठा करार दिया। उन्होंने कहा कि सीजेपी के कार्यकर्ता भारी भीड़ और राजनीतिक लामबंदी के साथ गांव में घुसे थे, जिसका ग्रामीणों ने केवल लोकतांत्रिक विरोध किया था और कोई हिंसा नहीं हुई। जुगल किशोर ने राजनीतिक पहलू साफ करते हुए बताया कि स्कूल के जीर्णोद्धार का काम स्थानीय विधायक के माध्यम से होना तय है, जिसके लिए बाकायदा 12 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया जा चुका है।
बाहरी दखल बनाम जनहित के मुद्दों की सियासी जंग
सीजेपी का लगातार कहना है कि स्कूल में संसाधनों की भारी कमी है और बच्चे बेहद खराब माहौल में पढ़ने को विवश हैं, इसी कारण पार्टी की टीम दोबारा स्थिति देखने पहुंची थी। लेकिन अब यह टकराव पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। सीजेपी जहां इस मामले को लेकर हमलावरों पर कानूनी शिकंजा कसने की मांग पर अड़ी है, वहीं ग्रामीणों का स्पष्ट रुख है कि वे गांव के विकास के नाम पर किसी भी बाहरी राजनीतिक दल की राजनीति और ड्रामेबाजी को गांव में घुसने नहीं देंगे।
