मध्य एशिया में भारत का बड़ा सियासी दांव: पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, SCO और ब्रिक्स पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरा केवल एक द्विपक्षीय यात्रा नहीं, बल्कि यूरेशियाई राजनीति में भारत के प्रभाव को नए सिरे से स्थापित करने की सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
वैश्विक राजनीति और यूरेशियाई भू-भाग में भारत की रणनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से चार दिनों के विदेश दौरे पर निकल चुके हैं। 1 सितंबर तक चलने वाली इस यात्रा के तहत पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान और फिर किर्गिस्तान की धरती पर होंगे। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में इस यात्रा को मध्य एशिया में चीन और अन्य शक्तियों के बीच भारत के स्वतंत्र कूटनीतिक, व्यापारिक और रणनीतिक प्रभाव को मजबूती देने की एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
ताशकंद शिखर वार्ता: मिर्जियोयेव के साथ रणनीतिक तालमेल
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे की शुरुआत उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद से कर रहे हैं, जहां वे राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय संवाद की मेज पर बैठेंगे। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच चर्चा के केंद्र में आपसी व्यापार, पूंजी निवेश, सैन्य-रक्षा सहयोग, यूरेशियाई कनेक्टिविटी, ऊर्जा साझेदारी और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला जैसे गंभीर राजनीतिक-आर्थिक विषय रहने वाले हैं।
यूरेशियाई कॉरिडोर और आर्थिक हितों की नई दिशा
ताशकंद में होने वाली बैठकों का सीधा असर भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति की गति पर पड़ने वाला है। भारत ऊर्जा और संसाधनों से संपन्न मध्य एशियाई देशों के साथ अपने रणनीतिक गठजोड़ को नए स्तर पर ले जाना चाहता है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार मार्ग बदल रहे हैं, उज्बेकिस्तान जैसे केंद्रीय देश के साथ शीर्ष स्तर की यह वार्ता द्विपक्षीय साझेदारी को नया भू-आर्थिक आधार प्रदान करेगी।
सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी: शास्त्री और गांधी को नमन
राजनीतिक कूटनीति को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर पहुंचेंगे और उनकी स्मृतियों को नमन करेंगे। इसके उपरांत वे महात्मा गांधी केंद्र का भी रुख करेंगे। यह कदम दोनों मुल्कों के बीच ऐतिहासिक विश्वास, साझी सांस्कृतिक विरासत और कूटनीतिक सद्भाव को जनता के स्तर पर और अधिक प्रगाढ़ करने का राजनीतिक प्रयास है।
31 अगस्त: बिश्केक में 26वें SCO सम्मेलन का मंच
उज्बेकिस्तान के बाद प्रधानमंत्री 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में कदम रखेंगे, जहां 26वां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस बहुपक्षीय मंच पर भारत क्षेत्रीय स्थिरता, निर्बाध कनेक्टिविटी और आर्थिक संप्रभुता के सवालों पर अपना स्वतंत्र भू-राजनीतिक दृष्टिकोण मजबूती से पेश करेगा।
आतंकवाद पर सख्त संदेश और अंतरराष्ट्रीय संतुलन
एससीओ के मंच पर भारत का प्रमुख ध्यान सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय तंत्र बनाने पर केंद्रित रहेगा। भारत हमेशा से यह दोहराता रहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं है। ऐसे में वैश्विक मंचों पर जारी तनावों के बीच बिश्केक में पीएम मोदी का कूटनीतिक रुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषकों की सीधी निगरानी में रहेगा।
सितंबर में भारत की ब्रिक्स मेजबानी की पूर्वपीठिका
मध्य एशिया का यह चार दिवसीय दौरा सितंबर में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के ठीक पहले हो रहा है, जिसकी अध्यक्षता और मेजबानी स्वयं भारत करने जा रहा है। ताशकंद से लेकर बिश्केक तक होने वाली यह राजनयिक बैठकें भारत को आगामी ब्रिक्स सम्मेलन के लिए यूरेशियाई देशों के साथ साझा समझ बनाने और अपनी वैश्विक विदेश नीति को धार देने का मौका देंगी।
