टीआई पर हवलदार ने लगाए मारपीट के आरोप: बोला- दांत तोड़ा, वर्दी फाड़ी; शिकायत के बाद खुद ही निलंबित
नो-एंट्री पर विवाद के बाद प्रधान आरक्षक ने टीआई और अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट के आरोप लगाए। शिकायत के बाद हवलदार के निलंबन ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

Jabalpur TI Constable Dispute: पुलिस से आम लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जुड़ी होती है, लेकिन जब पुलिसकर्मियों के बीच ही मारपीट के आरोप लगें, तो विभाग की जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। जबलपुर में शहपुरा थाने के प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे, उनके ड्राइवर राहुल गुप्ता और अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने, दांत तोड़ने और वर्दी फाड़ने के आरोप लगाए हैं। मामला नो-एंट्री में वाहनों को रोकने के दौरान हुए विवाद से जुड़ा है। खास बात यह है कि शिकायत लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचे प्रधान आरक्षक को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया। मामले की जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है।
नो-एंट्री में वाहनों की कतार, रात 1 बजे तक रोक
जानकारी के मुताबिक रविवार रात प्रधान आरक्षक लखन निषाद की ड्यूटी शहपुरा के बाहर बैरिकेड लगाकर वाहनों की जांच करने और उन्हें रोकने के लिए लगाई गई थी। उनके साथ यातायात पुलिस के कर्मचारी भी मौजूद थे।
निर्देश थे कि रात 1 बजे से पहले बड़े वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। रात करीब 12:30 बजे तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इसी दौरान एक ट्रक चालक ने जल्द भोपाल पहुंचने की बात कहते हुए वाहन को जाने देने का आग्रह किया।
लखन निषाद के मुताबिक, उन्होंने चालक को बताया कि एसडीएम और टीआई के निर्देशों के अनुसार रात 1 बजे से पहले बड़े वाहनों को जाने की अनुमति नहीं थी।
टीआई का नंबर देने के बाद फोन पर हुआ विवाद
प्रधान आरक्षक के अनुसार वाहनों की भीड़ और चालकों के बार-बार आग्रह के बीच उन्होंने एक चालक को टीआई का मोबाइल नंबर दिया। उन्होंने कहा कि यदि टीआई अनुमति देते हैं, तो वाहन को जाने दिया जा सकता है।
आरोप है कि चालक के फोन करने पर टीआई ने पूछा कि नंबर किसने दिया। चालक ने प्रधान आरक्षक का नाम बताया, जिसके बाद टीआई और लखन के बीच फोन पर बहस हो गई।
लखन का आरोप है कि कुछ देर बाद टीआई प्रवीण कुमार धुर्वे अपने ड्राइवर राहुल गुप्ता, आरक्षक विकास कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई।
दांत तोड़ने, सिर-नाक पर चोट और वर्दी फाड़ने का आरोप
प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर उन्हें पकड़कर मारा गया। उनके मुताबिक, इस दौरान दांत टूट गया, सिर और नाक पर चोट आई, चश्मा टूट गया और वर्दी भी फाड़ दी गई।
लखन ने बताया कि आसपास मौजूद दूसरे कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर उन्हें बचाया। उन्होंने यह भी कहा कि नो-एंट्री पॉइंट पर टैंकरों सहित कई वाहनों को रोका गया था, जिससे चालकों की भीड़ बढ़ गई थी। ये सभी आरोप प्रधान आरक्षक की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
घायल हालत में पहुंचे थाने, मेडिकल कॉलेज रेफर
लखन निषाद का आरोप है कि घटना के बाद जब वह अपनी गाड़ी लेने शहपुरा थाने पहुंचे, तो साथी पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। उनका कहना है कि टीआई के डर से उन्हें थाने में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
लखन के मुताबिक, मारपीट में उनके होंठ फट गए और हाथ में फ्रैक्चर की आशंका के चलते उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। चोटों की वास्तविक स्थिति और घटना के क्रम की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट तथा जांच से होगी।
टीआई ने मारपीट के आरोपों से किया इनकार
थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे ने मारपीट के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ग्वालियर में हुए हादसे को देखते हुए प्रधान आरक्षक की ड्यूटी रात 1 बजे तक नो-एंट्री पॉइंट पर लगाई गई थी।
टीआई के अनुसार, लखन बार-बार वाहनों को जल्दी जाने देने की बात कर रहे थे और उन्हें समझाइश दी गई थी। उन्होंने कहा कि उनके और प्रधान आरक्षक के बीच न तो कोई विवाद हुआ और न ही मारपीट की गई।
इस तरह, घटना को लेकर प्रधान आरक्षक और थाना प्रभारी के बयान अलग-अलग हैं। मामले की निष्पक्ष जांच से ही आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
एएसपी ने कहा- अनुशासनहीनता पर किया निलंबित
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी ने बताया कि शहपुरा थाना क्षेत्र में अमन ढाबा के पास रविवार देर रात वाहनों को रोकने के लिए प्रधान आरक्षक लखन निषाद की ड्यूटी लगाई गई थी।
एएसपी के मुताबिक, रात करीब 11:45 बजे थाना प्रभारी के साथ अनुशासनहीनता करने के मामले में लखन निषाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले की जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है।
फिलहाल जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नो-एंट्री पॉइंट पर वास्तव में क्या हुआ, मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है और निलंबन के आधार क्या थे। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।




