युवक की मौत के बाद खुली अस्पताल की पोल! एक्सपायरी दवाएं मिलीं; रजिस्ट्रेशन भी नहीं, जिला प्रशासन ने किया सील
जबलपुर में युवक की मौत के बाद सील अस्पताल की जांच में 23 प्रकार की दवाएं मिलीं, जिनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल हैं।

Jabalpur News: जबलपुर में बेलखाड़ू के पास स्थित अश्वनी अस्पताल की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। 19 वर्षीय युवक की मौत के बाद सील किए गए अस्पताल को मंगलवार शाम जांच के लिए खुलवाया गया। ड्रग इंस्पेक्टर, पुलिस और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) की मौजूदगी में हुई जांच के दौरान 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिलीं। इनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थीं। टीम ने करीब 12 हजार रुपए की दवाएं जब्त की हैं।
प्रारंभिक जांच में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल संचालिका सरिता साहू के पास एलोपैथिक चिकित्सा की मान्य डिग्री भी नहीं थी। आरोप है कि इसके बावजूद वह लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रही थीं।
युवक की मौत के बाद अस्पताल सील
अश्वनी अस्पताल को 19 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत के बाद सील किया गया था। मंगलवार को जांच के दौरान यहां बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी मिलीं। अधिकारियों ने दवाओं की जांच कर करीब 12 हजार रुपए का सामान जब्त किया।
जांच के दौरान अस्पताल में आवश्यक पंजीयन नहीं होने की बात भी सामने आई। अब संबंधित विभाग अस्पताल के संचालन और वहां मरीजों को दी जा रही दवाओं की जांच कर रहे हैं।
पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल पहुंचे थे शेखर
बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ला निवासी शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक तेज पेट दर्द हुआ था। परिजन उसे खैरी गांव स्थित अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां सुबह तक इलाज कराने के बाद परिजन उसे घर ले आए।
कुछ देर बाद शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। इसके बाद परिजन दोबारा अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
समीर चौधरी की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि अस्पताल संचालिका सरिता साहू के कहने पर उनके मददगार सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे। अगले दिन फिर इंजेक्शन दिया गया और ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई।
परिजनों का कहना है कि ड्रिप चढ़ने के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई। घटनास्थल से मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी। पुलिस ने बोतल, ड्रिप, निडिल, इंजेक्शन की खाली शीशी और दवाइयों के रैपर जब्त किए थे।
ड्रिप और इंजेक्शन की भी हो रही जांच
ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल, BMO डॉ. श्रीपति मिश्रा और बेलखाड़ू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा की टीम ने अस्पताल में दवाओं की जांच की। ड्रग इंस्पेक्टर के मुताबिक, अस्पताल में 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिलीं। इनमें एक्सपायरी दवाओं के अलावा ग्लूकोज की ड्रिप भी शामिल थी।
जांच के दौरान यह आशंका भी जताई गई कि शेखर को चढ़ाई गई ड्रिप में मिलाया गया इंजेक्शन एक्सपायरी हो सकता है। हालांकि, दवाओं या इंजेक्शन का युवक की मौत से कोई संबंध था या नहीं, यह जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
अस्पताल संचालिका जांच के दौरान नहीं पहुंचीं
अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल का जरूरी रजिस्ट्रेशन नहीं मिला और संचालिका के पास एलोपैथिक इलाज करने की मान्य डिग्री भी नहीं थी। जांच टीम ने सरिता साहू को कई बार मौके पर बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं।
फिलहाल पुलिस युवक की मौत के मामले की जांच कर रही है। वहीं, संबंधित विभाग अस्पताल में मिली एक्सपायरी दवाओं, पंजीयन और इलाज की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






